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काली तेरी गुट ते…’ नई पीढ़ी का ऑल-टाइम फेवरेट है ये पंजाबी लोकगीत; शादियों से लेकर क्लब्स तक मचाता है धमाल

शादी की शहनाई हो, कॉलेज का फेस्ट या दोस्तों का जश्न, जब तक पंजाबी बीट्स पर लाउडस्पीकर न थरथराए, महफिल का मजा ही अधूरा रहता है।

जी हां, जब ढोल पर ‘काली तेरी गुट ते परांदा तेरा लाल नी’ की ताल बजती है, तो फिर डांस फ्लोर से दूरी बनाना मुमकिन नहीं रहता। मगर क्या कभी झूमते-झूमते आपने गौर किया है कि सबको थिरकाने वाले इन खूबसूरत बोलों का असली मायने क्या है? आइए, आज इस सदाबहार पंजाबी लोकगीत के बारे में जानते हैं।

‘गुट’ और ‘परांदे’ का क्या है कनेक्शन?

अगर आसान शब्दों में समझें, तो यह गाना एक खूबसूरत लड़की की तारीफ और उसके साथ की जा रही मीठी छेड़छाड़ पर आधारित है। पंजाबी भाषा में ‘गुट’ का मतलब होता है ‘बालों की लंबी चोटी’। वहीं, ‘परांदा’ रंग-बिरंगे रेशमी धागों से बना एक आभूषण है, जिसे पंजाब की महिलाएं अपनी चोटी में बांधती हैं ताकि वह और भी लंबी और सुंदर दिखे।

इस गाने की पहली लाइन में ही एक आशिक लड़की की तारीफ करते हुए कहता है- “तुम्हारी काली और घनी चोटी में यह जो लाल रंग का परांदा है, वो तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है।”

सादगी में छिपी है पंजाब की अल्हड़ जवानी

यह गाना सिर्फ बालों और परांदे की तारीफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब की समृद्ध संस्कृति और वहां के अल्हड़पन की झलक दिखाता है। पुराने समय में जब लड़कियां सज-धज कर मेलों में जाती थीं या गिद्दा करती थीं, तो परांदा उनके शृंगार का सबसे जरूरी हिस्सा होता था।

गाने में लड़की से एक चुलबुले अंदाज में यह भी कहा जाता है कि, “हे रूप की रानी, अपनी इस खूबसूरती और लाल परांदे को जरा संभाल कर रखो, कहीं इसे देखकर कोई अपना दिल न हार बैठे।” यह नोकझोंक ही इस गाने को इतना खास बनाती है।

मशहूर लोक गायक आशा सिंह मस्ताना द्वारा गाए गए इसके सबसे लोकप्रिय संस्करण में ऐसी ही मीठी नोकझोंक देखने को मिलती है:

कन्ने दियां वालियां ते लोंग तेरा जान नी,
मार मुकाया सानू तेरे इस मान नी।

यानी तुम्हारे कानों की बालियां और नाक का लौंग हमारी जान ले रहा है और तुम्हारे गुरूर और इन नखरों ने तो हमें पूरी तरह घायल कर दिया है।

पंजाब के आंगनों से लेकर बड़े शहरों के पब तक का सफर

एक दौर था जब यह लोकगीत सिर्फ पंजाब के गांवों, आंगनों और लोक-नृत्यों तक ही सीमित था। महिलाएं ढोलक की थाप पर इसे गाती थीं, लेकिन इस गाने की धुन इतनी कैची और शब्द इतने सरल हैं कि यह धीरे-धीरे पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया।

आज समय बदल चुका है। बॉलीवुड फिल्मों से लेकर बड़े-बड़े क्लब्स और डिस्कोथेक में भी इस गाने के रीमिक्स खूब बजते हैं। कई मशहूर गायकों ने इसे अपने-अपने मॉडर्न अंदाज में गाया है, जिसने आज की नई पीढ़ी को भी इस गाने का दीवाना बना दिया है।

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