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बिहार-झारखंड

खाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री

बिहार में खाद की किल्लत और कालाबाजारी को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राज्य के कृषि मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह खाद डीलर हों, कंपनी के प्रतिनिधि हों या फिर सरकारी अधिकारी—दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

कृषि मंत्री श्री रामकृपाल यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम कर रही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि किसानों को खाद और बीज के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में खाद की आपूर्ति व्यवस्था पर सरकार पूरी तरह नजर बनाए हुए है।

कालाबाजारी पर ‘जीरो टॉलरेंस’

कृषि मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “जो लोग इस अवैध धंधे में शामिल हैं, वे सावधान हो जाएं। किसानों का शोषण किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

नेपाल तस्करी की सूचना पर FIR

 

श्री रामकृपाल यादव ने खुलासा किया कि कार्यभार संभालने के बाद उन्हें खाद तस्करी से जुड़े कई वीडियो और सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। खासकर मुजफ्फरपुर के रास्ते नेपाल की ओर खाद तस्करी की खबरें सामने आई थीं। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही मुख्यालय और जिला स्तर पर ‘उड़नदस्ता’ (Flying Squad) का गठन किया गया है, जो 24 घंटे निगरानी करेगा।

खाद की कोई कमी नहीं: मंत्री

कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि बिहार के किसी भी जिले में खाद की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि यूरिया, डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) और एसएसपी (SSP) का पर्याप्त भंडार राज्य में उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराएं नहीं।

शिकायत निवारण के लिए विशेष व्यवस्था

किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कृषि विभाग ने एक विशेष शिकायत कोषांग (Special Cell) की स्थापना की है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा की जा रही है और अब तक कई दोषी डीलरों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। साथ ही, स्टॉक का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में कोई अंतर न रहे।

कृषि मंत्री ने दोहराया कि किसान सरकार के लिए सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि ‘अन्नदाता’ हैं और उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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