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नैदानिक सेवाओं के लिए शून्य प्रतीक्षा समय सुनिश्चित करें: हिमाचल सीएम सुखू

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने स्वास्थ्य विभाग को सीटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी नैदानिक सेवाओं के लिए शून्य प्रतीक्षा अवधि प्राप्त करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है, जिससे रोगियों के लिए समय पर और परेशानी मुक्त स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सके।

आज यहां इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, चामियाना के डायग्नोस्टिक विभागों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने डायग्नोस्टिक सेवाओं को और मजबूत बनाने तथा मरीजों के लिए शून्य प्रतीक्षा समय के लक्ष्य को साकार करने के लिए डॉक्टरों से सुझाव और समर्थन भी मांगा।

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार आवश्यक जनशक्ति और आधुनिक नैदानिक उपकरण उपलब्ध करा रही है, तथा विभाग को इन आवश्यक सेवाओं के लिए प्रतीक्षा समय को समाप्त करने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए।” उन्होंने दोहराया कि वर्तमान राज्य सरकार स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को उन्नत करने और प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुखू ने कहा कि राज्य सरकार राज्य के भीतर विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए चिकित्सा, पैरामेडिकल और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भर रही है, जिससे मरीजों को उन्नत उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी।

आईजीएमसी के डॉक्टरों द्वारा उठाई गई मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन शीघ्र ही उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने और राज्य के लोगों की सेवा के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

सुखू ने कहा कि राज्य सरकार सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को व्यापक रूप से मजबूत कर रही है। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित एम्स में उपलब्ध उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरणों के बराबर उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए 3,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच बढ़ाने के लिए ये उन्नत मशीनें न केवल मेडिकल कॉलेजों में बल्कि राज्य भर के जिला, क्षेत्रीय और अन्य सिविल अस्पतालों में भी स्थापित की जाएंगी।

बैठक के दौरान प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव (स्वास्थ्य) एम सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ गोपाल बेरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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