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राजनीति

जम्मू को पांडवों की तरह छला गया… शिवसेना ने शुरू किया धर्मयुद्ध, आर्टिकल 371 की मांग, युवाओं से कहा- कमान संभालो

 शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जम्मू-कश्मीर इकाई एवं राष्ट्रीय हिंदू कल्याण संगठन ने मंगलवार को महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा स्थल पर प्रदर्शन किया। साथ ही जम्मू धर्मयुद्ध अभियान का शुभारंभ किया। संगठन ने जम्मू को अलग पूर्ण राज्य का दर्जा देने और आर्टिकल 371 के तहत विशेष संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने की मांग दोहराई।

शिवसेना (UBT) जम्मू-कश्मीर के प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 के राजनीतिक बदलावों के समय जम्मू की जनता से क्षेत्रीय भेदभाव समाप्त करने, संतुलित विकास सुनिश्चित करने और क्षेत्र का सम्मान बहाल करने का वादा किया गया था। 7 वर्ष बाद भी जम्मू राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक उपेक्षा का सामना कर रहा है।

पांडवों की तरह जम्मू को भी अपनों ने ही छला

साहनी ने कहा, “पांडवों की तरह जम्मू को भी अपनों ने ही छला है। यदि जम्मू-कश्मीर के सीधे केंद्र शासित होने के बावजूद जम्मू के साथ अन्याय और उपेक्षा जारी है, तो इसकी जवाबदेही केंद्र सरकार और जम्मू के नाम पर जनादेश प्राप्त करने वाली भाजपा पर तय होनी चाहिए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू के जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती मौजूदगी, स्थानीय संसाधनों पर बढ़ता दबाव तथा बाहरी कंपनियों और ठेकेदारों का बढ़ता वर्चस्व क्षेत्र के मूल निवासियों के सामाजिक एवं आर्थिक हितों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

आर्टिकल 371 की मांग दोaहराई

साहनी ने कहा कि जम्मू को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार चाहिए। उन्होंने जम्मू को अलग पूर्ण राज्य का दर्जा देने तथा अनुच्छेद 371 के तहत भूमि, सरकारी नौकरियों, स्थानीय व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों पर मूल निवासियों के अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने की मांग दोहराई। यहां जानिए आर्टिकल 371 के बारे में…

आर्टिकल 371 के फायदे

1. जमीन की सुरक्षा: जैसे नागालैंड और मिजोरम में बाहर का व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता, वैसे ही जम्मू-कश्मीर में भी डोमिसाइल कानून को संवैधानिक सुरक्षा मिल जाएगी। अभी कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है।

 2. नौकरी और आरक्षण में संरक्षण: स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण।

3. सांस्कृतिक पहचान की रक्षा: ताकि डोगरी, कश्मीरी, गुज्जर-बकरवाल समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं को मान्यता मिले।

4. पहाड़ी क्षेत्रों को खास अधिकार: 371 में पहाड़ी जिलों के लिए अलग विकास बोर्ड का प्रावधान है।

युवाओं और छात्रों से आह्वान

उन्होंने युवाओं और छात्रों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा, “इतिहास गवाह है कि हर बड़े परिवर्तन का नेतृत्व युवाओं ने किया है। अब समय दर्शक बने रहने का नहीं, बल्कि नेतृत्व संभालकर जम्मू के सम्मान और अधिकारों की इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने का है।”

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