दिल्ली
दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण, सुरक्षा उल्लंघन पर कार्रवाई के आदेश दिए
मालवीय नगर अग्निकांड के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को राजधानी में अवैध निर्माणों, अग्नि सुरक्षा उल्लंघनों और प्रशासनिक लापरवाही पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक कड़ी कार्य योजना पेश की।
दिल्ली सचिवालय में एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को सख्त जवाबदेही लागू करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने का निर्देश दिया।
बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा, ‘मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि एक फुलप्रूफ प्रणाली स्थापित करना है जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को स्थायी रूप से रोक सके।
नए उपायों के तहत, अवैध निर्माण या सुरक्षा उल्लंघनों की अनुमति देने में लापरवाही या मिलीभगत वाले अधिकारियों को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो दो साल तक की कैद और पर्याप्त जुर्माने का प्रावधान करता है। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि जहां भी आवश्यक हो, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया जा सकता है।
एक महत्वपूर्ण कदम में, सरकार ने कहा कि लापरवाही के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान की वसूली राजस्व वसूली अधिनियम के तहत दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन और संपत्तियों से वसूल की जाएगी।
सरकार ने जिलाधिकारियों की शक्तियों का विस्तार करने का फैसला किया है, जिससे उन्हें जवाबदेही तय करने, अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने, एफआईआर का आदेश देने और सभी विभागों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति मिल जाएगी।
निगरानी को मजबूत करने के लिए, अनधिकृत निर्माण की पहचान करने के लिए हर तीन महीने में ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह इमेजरी और डिजिटल मैपिंग का उपयोग किया जाएगा। एक समर्पित ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और एक विशेष ड्रोन निगरानी प्रकोष्ठ की भी योजना बनाई जा रही है।
गेस्ट हाउस, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में संयुक्त निरीक्षण समितियों का गठन किया गया है। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, और बिना अनुमति के या लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को तत्काल सील का सामना करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने ऊंची इमारतों की विशेष निगरानी, अग्नि सुरक्षा मानदंडों का कड़ाई से पालन और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम की समीक्षा के भी आदेश दिए। वैध पूर्णता प्रमाण पत्र के बिना भवनों को पानी और बिजली कनेक्शन से वंचित किया जा सकता है।
बैठक का समापन करते हुए सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए मौजूदा अभियान को ‘सुधार का अंतिम अवसर’ बताया और यह स्पष्ट किया कि अगर उल्लंघन जारी रहता है तो सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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