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SIR पर कांग्रेस की सख्ती: हरियाणा में स्टेट लेवल कमेटी बनी, प्रदेश अध्यक्ष करेंगे नेतृत्व
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस ने पूरी तरह अलर्ट मोड में आने का फैसला किया है। पार्टी को आशंका है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं या फिर राजनीतिक रूप से प्रभावित निर्णय लिए जा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने राज्य स्तर पर एक विशेष मॉनिटरिंग और एक्शन कमेटी का गठन किया है, जो पूरे प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पर नजर रखेगी।
इस कमेटी की सबसे अहम बात यह है कि इसमें किसी भी सांसद को शामिल नहीं किया गया है, जबकि इसकी कमान सीधे हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के हाथों में दी गई है। पार्टी के इस फैसले को संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है
कांग्रेस का मानना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव होती है। यदि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया और जनता के विश्वास पर पड़ता है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में वोटर लिस्ट रिवीजन के नाम पर गरीब, दलित, अल्पसंख्यक और प्रवासी वर्ग के मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
हरियाणा में SIR की घोषणा के बाद कांग्रेस को आशंका है कि कहीं यह प्रक्रिया भी राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक लापरवाही का शिकार न हो जाए। इसी कारण पार्टी ने समय रहते सख्त कदम उठाते हुए निगरानी तंत्र मजबूत करने का फैसला लिया है।
कांग्रेस द्वारा गठित यह स्टेट लेवल कमेटी SIR से जुड़े हर पहलू की मॉनिटरिंग करेगी। कमेटी का काम सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यदि कहीं गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो तुरंत एक्शन लेने की भी जिम्मेदारी इसी कमेटी की होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह कमेटी जिला और ब्लॉक स्तर पर काम कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क में रहेगी। वोटर लिस्ट से नाम हटने, नए नाम जोड़ने या किसी समुदाय विशेष को प्रभावित करने वाले मामलों की रिपोर्ट सीधे स्टेट कमेटी तक पहुंचेगी।
इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह है कि किसी भी कांग्रेस सांसद को कमेटी में शामिल नहीं किया गया है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी चाहती है कि यह कमेटी पूरी तरह संगठनात्मक और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे। सांसदों की व्यस्तता और संसदीय जिम्मेदारियों को देखते हुए पार्टी ने फैसला लिया कि इस संवेदनशील प्रक्रिया की कमान सीधे संगठन के पास रहे।
इसके अलावा, पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि SIR जैसे मुद्दे को केवल दिल्ली या संसद तक सीमित न रखकर प्रदेश और बूथ स्तर तक मजबूती से उठाया जाएगा।
इस कमेटी का नेतृत्व सीधे हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदय भान करेंगे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में यह कमेटी ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर पाएगी।
उदय भान को संगठन में मजबूत पकड़ और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद रखने वाला नेता माना जाता है। उनकी अगुवाई में कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि SIR के दौरान किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।
कांग्रेस ने तय किया है कि SIR को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे आम जनता को यह समझा सकें कि वोटर लिस्ट में नाम कैसे चेक करें, गलती होने पर आपत्ति कैसे दर्ज कराएं और किन दस्तावेजों की जरूरत होगी।
पार्टी का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाते हैं। इसी को रोकने के लिए कांग्रेस संगठन स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। हरियाणा में मुकाबला कड़ा माना जा रहा है और ऐसे में वोटर लिस्ट का मुद्दा बेहद संवेदनशील हो जाता है।
कांग्रेस नहीं चाहती कि किसी भी स्तर पर ऐसा आरोप लगे कि उसने SIR को हल्के में लिया। पार्टी इस बार पहले से ही पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है।
हालांकि कांग्रेस ने सीधे तौर पर किसी पार्टी का नाम नहीं लिया है, लेकिन SIR को लेकर उसकी सतर्कता को सत्तारूढ़ दल पर परोक्ष हमला माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष का काम है कि वह हर कदम पर नजर रखे और जरूरत पड़ने पर सवाल उठाए।
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