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बिहार-झारखंड

कट‍िहार में पानी ही पानी : गलियां बनीं नदियां, घरों पर लटके ताले, ट्रक के ट्यूब पर जिंदगी, छेद वाली सरकारी नाव पर सवारी

 बरारी प्रखंड के कुंडी दुर्गास्थान से जैसे ही नाव आगे खुली, सामने मंदिर का गर्भगृह पानी में डूबा नजर आया। किनारे कतारबद्ध बंधी नावें और जलमग्न रास्ते यह गवाही दे रहे थे कि यहां की गलियां अब पूरी तरह नदी में तब्दील हो चुकी हैं।

नाव आगे बढ़ी तो कहीं सिर्फ पक्के मकानों की छतें दिखाई दीं, कहीं झोपड़ियों का ऊपरी सिरा और कहीं चौखट पर लटके भारी ताले यह बता रहे थे कि लोग अपने आशियाने छोड़कर पलायन कर चुके हैं। नाविक महावीर पूरे आत्मविश्वास से पतवार थामे थे। वार्ड संख्या 11 और फिर वार्ड संख्या 10 की ओर बढ़ने पर चारों ओर सिर्फ पानी का सन्नाटा पसरा दिखा। जिन पगडंडियों पर कभी बच्चे दौड़ते थे, वहां आज नावें तैर रही हैं।

  • कटिहार जिले के बरारी प्रखंड में बाढ़ से विकराल हालात; दर्जनों गांवों की गलियां जलमग्न, आवागमन का एकमात्र सहारा बनीं नावें

  • बचाव में जुटी सरकारी नाव खुद पानी से जूझ रही; आगे-पीछे छेद होने के कारण मिट्टी भरकर और बाल्टी से पानी उलीचकर हो रहा परिचालन

  • ट्रक के ट्यूब और केले के थंब पर सब्जी बेचकर जिंदगी गुजार रहे किशोर-किशोरी; राहत शिविरों में मवेशी चारा वितरण में पक्षपात का आरोप

  • मेडिकल कैंप में पहुंचे 90% मरीज त्वचा रोग से पीड़ित, ओआरएस घोल नदारद; बरारी सीओ ने कहा- क्षतिग्रस्त नाव चलाने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकारी नाव में छेद, मिट्टी भरकर पानी उलीच रहे नाविक

गांव से वापसी के दौरान सरकारी राहत कार्य की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई। प्रशासन द्वारा चलाई जा रही एक सरकारी नाव में नाविक तो पतवार संभाल रहा था, लेकिन उसके साथ बैठा एक किशोर लगातार बाल्टी से नाव के भीतर भर रहा पानी बाहर निकाल रहा था। नाविक संतोष रविदास ने व्यवस्था की लाचारी उजागर करते हुए बताया कि नाव के आगे और पीछे दोनों तरफ छेद हो चुके हैं। छेद को मिट्टी से दबाया गया है, लेकिन पानी का रिसाव बंद नहीं होता। जान जोखिम में डालकर लगातार पानी उलीचते हुए लोगों को पार कराना मजबूरी बन चुका है।इंसान के जीने की अदम्य जिजीविषा भी दिखी। ट्रक के दो बड़े ट्यूबों को केले के थंब से बांधकर बनाई गई जुगाड़ू नाव पर सवार शोभा और उसका साथी बाढ़ के पानी में घिरे घरों तक हरी सब्जियां और जरूरी घरेलू सामान पहुंचाकर रोजी-रोटी कमाते नजर आए।

सकी लाठी उसकी भैंस’, राहत और चारे के वितरण में पक्षपात का आरोप

दुर्गास्थान स्थित आश्रय स्थल पर लौटने पर विस्थापितों के गुस्से का सैलाब देखने को मिला। कुंडीधार भवानीपुर-मोहनाचांदपुर के 70 वर्षीय बुजुर्ग राधा मोहन महतो और संजय राम ने आरोप लगाया कि राहत सामग्री, पॉलीथिन और मवेशियों के चारे के वितरण में वास्तविक पीड़ितों की अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों ने कहा कि सप्ताह भर में महज दो डलिया भूसा मिला, जो तीन मवेशियों के लिए एक दिन भी काफी नहीं है। चारा वितरण में प्रभावशाली लोगों का दबदबा है। महिलाओं ने शिकायत की कि सामुदायिक रसोई में रात का खाना घट जाता है या बासी खाना परोसा जाता है। हालांकि रसोई केंद्र पर प्रतिनियुक्त शिक्षक संजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि रोजाना दोनों वक्त मिलाकर 1500 से अधिक लोगों को भरपेट भोजन कराया जा रहा है।

त्वचा रोग की चपेट में 90% पीड़ित, ओआरएस तक गायब

लगातार गंदे और दूषित बाढ़ के पानी में रहने के कारण राहत शिविरों में बीमारियां पैर पसार चुकी हैं। मेडिकल कैंप के कर्मियों के अनुसार, स्वास्थ्य जांच के लिए आने वाले करीब 90 फीसदी मरीज गंभीर चर्म रोग (त्वचा संक्रमण) और पेट की बीमारियों से ग्रसित हैं। कैंप में सामान्य दवाएं तो हैं, लेकिन डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए जरूरी ओआरएस (ORS) के पैकेट उपलब्ध नहीं हैं। शिविर में काम न होने के कारण पुरुष ताश खेलकर या मछली पकड़ने का जाल बुनकर बेबसी में दिन काट रहे हैं।

बरारी के दर्जनों गांव और पंचायतें जलमग्न

प्रखंड के दुर्गापुर पंचायत (आजपुर शंकरगंज, बालू घाट मरकाहा, रानी घाट), सुखासन पंचायत के तीन वार्ड, वैशागोविन्दपुर (छापगंज, बसगढ़ा, चितौड़िया, प्रतापगंज, रघुनाथपुर, संथाल टोला), मोहना चांदपुर के आठ वार्ड, समदा, सोनाखाल, कुंडी, भवानीपुर, मोहनाडीह, विशनपुर (डहरा, बकिया रानीचक), शीशिया, कांतनगर, राजापाकर, सिमराहा, उत्तरी व दक्षिणी भण्डारतल, बारीनगर, गुरु मेला, लक्ष्मीपुर, बरेटा के टप्पू गांव और बरारी नगर पंचायत का जीरापट्टी वार्ड बाढ़ के पानी में पूरी तरह घिरे हुए हैं।

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