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पंजाब

केजरीवाल को मिली राहत पर बोले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान – “सत्य और लोकतंत्र की हुई जीत”

पंजाब के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, सुरक्षा और विकास पर हुई व्यापक चर्चा

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 28 फरवरी 2026।
दिल्ली की आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को अदालत से बड़ी राहत मिलने के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “सत्य और लोकतंत्र की जीत” बताया है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला साबित करता है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को दबाने की कोशिश की जा रही थी।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अदालत का यह निर्णय न केवल आम आदमी पार्टी के लिए राहत की खबर है, बल्कि पूरे देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया है। मान के अनुसार, इस फैसले ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है जो राजनीतिक मंशा से लगाए गए थे।

भगवंत मान ने अपने बयान में कहा, “हम पहले दिन से कह रहे थे कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित था। आज अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता। सत्य की हमेशा जीत होती है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस फैसले से आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि हर दल और हर नेता को अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार की नीतियां जनहित में बनाई गई थीं और उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद थे। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि सच्चाई के सामने झूठ टिक नहीं सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार पहले से ही केंद्र के साथ कई मुद्दों पर मतभेद रखती आई है। ऐसे में यह बयान राजनीतिक समीकरणों को और तेज कर सकता है। भगवंत मान का यह बयान न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहजनक है, बल्कि विपक्षी राजनीति को भी नई दिशा दे सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि न्यायपालिका ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को साबित किया है। उन्होंने अदालत का सम्मान करते हुए कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका – जब संतुलित और स्वतंत्र रहते हैं, तभी देश आगे बढ़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के समर्थकों में उत्साह देखा गया। पंजाब और दिल्ली सहित कई राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भगवंत मान ने कहा कि यह सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की जीत है जो सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं।

हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक इस बयान पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक विमर्श का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

मुख्यमंत्री मान ने यह भी कहा कि सरकार का ध्यान अब विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जनता की सेवा करना ही उनकी प्राथमिकता है।

अंत में, भगवंत मान ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता ही अंतिम निर्णायक होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता सच्चाई और ईमानदारी की राजनीति का समर्थन करती रहेगी। अदालत के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।

इस प्रकार, दिल्ली आबकारी नीति मामले में मिली राहत के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री का यह बयान राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दल किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

 
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