लाइफ स्टाइल
ठेठ हरियाणवी बोली और ससुराल न जाने की जिद, इस खोड़िया लोकगीत के हर बोल का मजेदार है मतलब
भारत में कई ऐसी लोक परंपराएं हैं, जो देश ही नहीं, दुनियाभर से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। लोक गीत इन्हीं परंपराओं का हिस्सा है, जो अक्सर शादी-ब्याह या तीज-त्योहार के मौके पर गाए जाते हैं।
ढोलक की थाप पर बजने वाले ये लोकगीत भले ही देश के अलग-अलग हिस्सों मे अलग-अलग भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं, लेकिन इनका अर्थ और मकसद लगभग एक ही होता है। ऐसे ही कुछ खास लोकगीत हरियाणा भी मिट्टी से भी जन्मे हैं, जिन्हें अब पूरे देश में पसंद किया जाता है। आज हम आपको हरियाणा के ऐसे ही एक गीत के बारे में बताएंगे, जो आमतौर पर शादी- ब्याह के मौके पर गाया जाता है।
हरियाणा का खोड़िया गीत
पारंपरिक शादियों में संगीत के दौरान अगर महिलाओं का चुलबुला और मजेदार माहौल ना देखने को मिले, तो शादी की रौनक अधूरी-सी लगती है। यह एक खास तरह की रस्म होती है, जिसमें महिलाएं रात के समय ढोलक की तेज थाप, बेफिक्र होकर हंसी-ठिठोली और बेबाक अंदाज में ताने में कसती हैं। हरियाणा की संस्कृति में इस खास रस्म को ‘खोड़िया’ कहा जाता है।
खोड़िया का सबसे चर्चित गीत
इस मस्ती और उल्लास से भरे माहौल में एक ऐसा मशहूर लोकगीत गाया जाता है, जो वहां मौजूद हर इंसान को मुस्कुराने पर मजबूर कर देता है। हम बात कर रहे हैं ठेठ हरियाणवी बोली में गाए गए गीत- “कुएं में डूब मर जाऊंगी, पर सासरे (ससुराल) नहीं जाऊंगी” की। यह सिर्फ एक साधारण- सा गाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी, उनकी मेहनत और सास-बहू की खट्टी-मीठी नोकझोंक को बयां करने का एक बेहद मजेदर तरीका है।
क्या इस गीत के बोलों का मतलब
यह लोकगीत बड़ा ही मजेदार और हास्य से भरा हुआ है। इस गीत में एक नई नवेली दुल्हन अपने मायके में बैठी हुई है और ससुराल वापस जाने से साफ मना कर रही है। ससुराल न जाने के लिए वह इतने नखरे दिखाती है और बढ़ा-चढ़ाकर ससुराल में होने वाली परेशानियों के बारे में बताते हुए कहती है कि ससुराल जाने के बजाय कुएं में कूदकर जान देना ज्यादा पसंद करेगी।
दरअसल, लड़की ऐसा ससुराल में कराए जाने वाले घर के भारी-भरकम कामों से बचने के लिए एक मजाकिया बहाने के तौर पर कहती है। इस गीत की पंक्तियां कुछ इस तरह हैं-
हाथ की चाकी पे चून पिसवावे, मोटा-मोटा पीसू तो दलिया बतावे,मैं तो पीस-पीस मर जाऊंगी, पर नहीं सासरे जाऊंगी…”
इन पंक्तियों में लड़की कहती है कि ससुराल में हाथ की चक्की से आटा पिसवाते हैं, और अगर थोड़ा मोटा पीस जाए तो उसे दलिया बोलकर ताना मारते हैं। ऐसे तो मैं आटा-आटा पीस-पीसकर मर जाऊंगी, इसलिए सुसराल नहीं जाऊंगी।
“माटी के चूल्हे पे रोटी पुआवे, मैं तो धूमें में अंधी हो जाऊंगी,कुएं में डूब मर जाऊंगी, पर नहीं सासरे जाऊंगी…”
इसके बाद लड़की आगे की पंक्तियों में कहती हैं कि ससुराल में मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनवाते हैं, जिसके धुएं से मैं अंधी हो जाऊंगी। इसलिए मैं ससुराल नहीं जाऊंगी।
क्या है इन गीतों का असल मतलब?
सुनने यह गीत भले ही एक नई-नवेली दुल्हन की शिकायत लगती है, लेकिन अगर अगर हम इसके सांस्कृतिक मायने समझें, तो यह कोई विद्रोह या गुस्सा नहीं है। बल्कि, यह ग्रामीण औरतों के लिए अपनी दिन भर की थकान, घरे के काम के बोझ और तनाव को हंसी-मजाक के जरिए दूर करने का एक बेहतरीन जरिया रहा है।
महिलाएं सदियों से ऐसी लोकगीतों के जरिए अपने दिल की बात और अपनी छोटी-मोटी परेशानियां एक-दूसरे से साझा करती आई हैं। बदलते समय के साथ अब ये गीत गांव की मिट्टी से निकलकर सोशल मीडिया की दुनिया पर भी राज करने लगे हैं। यही वजह है कि आज इस हरियाणवी लोकगीत को कई मशहूर गायकों ने नए और ट्रेंडी अंदाज में पेश किया है।
-
देश10 months ago‘न्याय के साथ विकास’ से ‘Ease of Living’ तक: बिहार को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
-
देश9 months ago2027 चुनाव से पहले पंजाब सीएम भगवंत मान का बड़ा राजनीतिक दांव
-
विदेश9 months agoफर्जी डिग्री रैकेट पर ऑस्ट्रेलिया में हंगामा, भारतीय कार्रवाई का हवाला देकर सीनेटर मैल्कम रॉबर्ट्स ने छात्र वीज़ा सिस्टम पर उठाए सवाल
-
उत्तर प्रदेश10 months agoपूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जेल में बिगड़ी तबीयत, देवरिया से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
-
बिहार-झारखंड10 months agoखाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री
-
देश9 months agoराष्ट्रपति द्रौपादी मुर्मु का अमृतसर साहिब में भव्य स्वागत, CM भगवंत मान ने सिख मर्यादा व संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
-
पंजाब9 months agoमीडिया पर दबाव के आरोप, पंजाब की राजनीति में बढ़ा विवाद
-
दिल्ली9 months agoपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अमित शाह से करेंगे मुलाकात, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

