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बिहार-झारखंड

बिहार: ब्रहमपुर विधायक शम्भू यादव का विवादित बयान—“राइफल के बल पर भी बनवाऊंगा सड़क”

बिहार: ब्रहमपुर विधायक शम्भू यादव का विवादित बयान—“राइफल के बल पर भी बनवाऊंगा सड़क”
बिहार के बक्सर जिले के ब्रहमपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक शम्भू यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका एक ऐसा बयान है, जिसने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रशासनिक और कानूनी हलकों में भी हलचल मचा दी है। जानकारी के मुताबिक, जवाही गांव (बिहार) से जुड़ा एक सड़क निर्माण का मामला इन दिनों माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। बावजूद इसके, विधायक ने कथित तौर पर कहा है कि वे “राइफल के बल पर भी सड़क बनवाने को तैयार हैं।”
यह बयान सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इसे कानून व्यवस्था और न्यायपालिका के प्रति सीधी चुनौती बताया है। उनका कहना है कि जब मामला कोर्ट में है, तब इस तरह का बयान न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया का अनादर है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी खतरनाक संकेत देता है। विपक्ष ने प्रशासन से इस पूरे मामले में संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, विधायक शम्भू यादव के समर्थक उनके बयान को अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, विधायक का यह बयान जनता के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और बेचैनी को दर्शाता है। समर्थकों का तर्क है कि यह “रूपक” के तौर पर कहा गया बयान है, जिसका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान खींचना है, न कि वास्तव में किसी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देना।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञ इस मामले को गंभीर मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब कोई मामला न्यायालय में लंबित होता है, तब उससे जुड़े किसी भी पक्ष द्वारा इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं माना जाता। इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बयान में बल प्रयोग या हथियार का जिक्र है, तो यह कानून की दृष्टि से और भी संवेदनशील हो जाता है।
स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण पर नजर रखी जा रही है। अगर बयान की पुष्टि होती है और इसे कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो आगे की कार्रवाई संभव है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और उनकी भाषा की मर्यादा क्या होनी चाहिए। जहां एक ओर जनता अपने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की मांग करती है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि इन मांगों को संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर ही पूरा किया जाए।
फिलहाल, जवाही गांव की सड़क का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सभी की नजरें आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।

 

 

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