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मणिपुर में राहत शिविरों में हुई मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताया है, मुख्य सचिव से पूछा जवाब

आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के लिए राहत शिविरों में हुई कई मौतों पर दुख जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह जांच करने, आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराएं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने राज्य के शीर्ष नौकरशाह को आगाह करते हुए पूछा कि राहत शिविरों में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की अप्राकृतिक मौतों के संबंध में न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति द्वारा दी गई सूचना पर कोई महत्वपूर्ण कदम क्यों नहीं उठाया गया।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”हम मणिपुर के मुख्य सचिव को मणिपुर में राहत शिविरों में हुई मौतों, विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हैं।

पीठ ने कहा, ‘राज्य यह भी बताने के लिए बाध्य है कि राहत शिविरों में शरण लेने के दौरान आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को मुआवजे के रूप में केवल 20,000-30,000 रुपये का भुगतान क्यों किया गया.’

पीठ ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एमएसएलएसए) को इस मुद्दे पर अलग स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

सीजेआई ने एमएसएलएसए से यह देखने को कहा कि सभी अप्राकृतिक मौत के मामलों में एफआईआर दर्ज की जाए।

पीठ ने एमएसएलएसए से यह भी कहा कि वह यह देखे कि प्राथमिकियों की तेजी से जांच हो और राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

पीठ ने न्यायमूर्ति मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की उन खबरों का अवलोकन करने के बाद यह आदेश दिया कि मणिपुर में राहत शिविरों में 30 से अधिक मौतें हुई हैं और उनमें से एक मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद हुई है।

इसके अलावा, पीठ ने उम्मीद जताई कि मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से उत्पन्न सीबीआई और एनआईए के मामलों की विशेष सुनवाई के लिए गठित दो विशेष ट्रायल कोर्ट अपने मुकदमे को तेजी से पूरा करेंगी।

इन खबरों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि मामलों का विवरण विधिक सेवा के वकील को मुहैया करा दिया गया है और याचिकाकर्ता पीड़ित अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए उनका लाभ उठा सकते हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि राज्य सरकार और मणिपुर हिंसा के मामलों में सीबीआई की जांच की निगरानी कर रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी दत्तात्रेय पडसलगीकर ने विवरण उपलब्ध कराया।

सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि संघीय जांच एजेंसी ने 31 मामलों की जांच की है, जिसमें से 28 में अंतिम रिपोर्ट दायर की गई है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई के तीन मामलों की जांच अभी भी चल रही है।

विधि अधिकारी ने कहा कि सीबीआई के मामलों को छोड़कर, राज्य ने आठ जिलों में स्थानीय पुलिस अधिकारियों की 42 एसआईटी का गठन किया।

उन्होंने कहा कि एसआईटी ने 3,020 मामले दर्ज किए हैं और 302 मामलों में आरोपपत्र दायर किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि 1,583 मामलों में एसआईटी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है और 1,135 मामलों में जांच चल रही है।

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