राज्य
रेवाड़ी में स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च किए गए 27.35 करोड़ रुपये, फिर भी मरीजों की परेशानी जारी
रेवाड़ी में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिले भर में लगभग 20 स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण, मरम्मत, रखरखाव और उन्नयन पर काम चल रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में 27.35 करोड़ रुपये की लागत से नए भवनों का निर्माण, पुराने भवनों की मरम्मत और अन्य रखरखाव कार्य किए जा रहे हैं।
रेवाड़ी के सिविल अस्पताल और मीरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेष मरम्मत की गई है, जबकि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवनों का निर्माण प्रगति पर है।
लगातार बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए धारूहेड़ा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में अपग्रेड किया गया है।
जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था में भी काफी प्रगति हुई है।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने हाल ही में एक बयान में कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
मंत्री ने कहा, “इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम निवासियों को अपने इलाज के लिए दूर यात्रा न करनी पड़े और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उनके लिए विश्वास का केंद्र बनें।
बहरहाल, जिले के सरकारी अस्पताल विविध चुनौतियों और कमियों से जूझ रहे हैं, जिससे इन अस्पतालों में आने वाले रोगियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
न केवल जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्र और उप-केंद्र हैं, बल्कि रेवाड़ी शहर में स्थित सिविल अस्पताल को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सिविल अस्पताल के पुराने ब्लॉक को फिर से बनाने की जरूरत है, लेकिन निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।
इसके अलावा, रोगियों की भारी भीड़ को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों और लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफर जैसे पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या अपर्याप्त है।
उदाहरण के लिए, अस्पताल में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट है, जिसे दैनिक आधार पर बड़ी संख्या में रोगियों के लिए अल्ट्रासाउंड के साथ-साथ सीटी स्कैन प्रक्रियाएं भी करनी होती हैं।
मरीज और उनके तीमारदार भी अस्पताल में दवाओं की कमी की शिकायत करते हैं।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव कहते हैं, “बहुत कम विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी सेवा का विकल्प चुनते हैं क्योंकि उन्हें निजी क्षेत्र में बहुत अधिक पैकेज की पेशकश की जाती है।
उनका कहना है कि अगर सरकार डॉक्टरों को बनाए रखना चाहती है तो उन्हें अधिक प्रोत्साहन और काम करने का अच्छा माहौल प्रदान करना चाहिए।
डॉ. यादव ने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के संवर्धन में शामिल प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि इन्हें और अधिक प्रभावी और कुशल बनाया जा सके।
-
देश10 months ago‘न्याय के साथ विकास’ से ‘Ease of Living’ तक: बिहार को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
-
देश9 months ago2027 चुनाव से पहले पंजाब सीएम भगवंत मान का बड़ा राजनीतिक दांव
-
विदेश10 months agoफर्जी डिग्री रैकेट पर ऑस्ट्रेलिया में हंगामा, भारतीय कार्रवाई का हवाला देकर सीनेटर मैल्कम रॉबर्ट्स ने छात्र वीज़ा सिस्टम पर उठाए सवाल
-
उत्तर प्रदेश10 months agoपूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जेल में बिगड़ी तबीयत, देवरिया से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
-
बिहार-झारखंड10 months agoखाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री
-
देश9 months agoराष्ट्रपति द्रौपादी मुर्मु का अमृतसर साहिब में भव्य स्वागत, CM भगवंत मान ने सिख मर्यादा व संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
-
पंजाब9 months agoमीडिया पर दबाव के आरोप, पंजाब की राजनीति में बढ़ा विवाद
-
दिल्ली9 months agoपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अमित शाह से करेंगे मुलाकात, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

