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हरियाणा

हरियाणा विधानसभा में आज उस समय माहौल गर्म और चर्चा का केंद्र बन गया जब नायब सिंह सैनी ने राज्य में खनन राजस्व को लेकर बड़ा दावा पेश किया।

हरियाणा विधानसभा में आज उस समय माहौल गर्म और चर्चा का केंद्र बन गया जब नायब सिंह सैनी ने राज्य में खनन राजस्व को लेकर बड़ा दावा पेश किया। मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़ों के साथ बताया कि वर्ष 2014-15 से लेकर 2025-26 तक हरियाणा में खनन से होने वाला राजस्व 863 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि इस अवधि में औसत वार्षिक राजस्व 671 करोड़ 91 लाख रुपये रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में खनन राजस्व में पांच गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती का संकेत है।

मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह वृद्धि केवल संयोग नहीं बल्कि सरकार की पारदर्शी नीतियों और सख्त प्रशासनिक कदमों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पहले खनन क्षेत्र में अव्यवस्था और अवैध गतिविधियों के कारण राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। सरकार ने अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, कड़े कानून और त्वरित कार्रवाई की नीति अपनाई है।

सदन में बोलते हुए उन्होंने बताया कि अवैध खनन को रोकने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार निगरानी कर रही हैं। इसके अलावा खनन स्थलों पर जीपीएस ट्रैकिंग और ऑनलाइन परमिट सिस्टम लागू किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन उपायों से न केवल अवैध खनन पर नियंत्रण हुआ है, बल्कि राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए खनन कार्यों को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रह सकें।

विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सैनी ने कहा कि उनकी सरकार हर मुद्दे पर पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष को भी विकास कार्यों में सहयोग देने की अपील की।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में सत्तापक्ष के विधायकों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन किया, वहीं विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए। हालांकि, सरकार ने अपने आंकड़ों और नीतियों के आधार पर अपने पक्ष को मजबूती से रखा।

कुल मिलाकर, खनन राजस्व में हुई इस बढ़ोतरी को लेकर सरकार ने अपनी उपलब्धि को प्रमुखता से पेश किया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने इन दावों को जमीन पर कितनी मजबूती से कायम रख पाती है और क्या यह वृद्धि आगे भी इसी तरह जारी रहती है।

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