राज्य
शहरों की दूषित हवा को सोख लेगा शैवाल वाला यह पेड़
शहर में रोशनपुरा चौराहे और अशोका गार्डन के स्वामी विवेकानंद पार्क में प्लास्टिक और फाइबर से बना एक बेलनाकार ढांचा, आसपास से गुजर रहे लोगों को आकर्षित कर रहा है। इस पारदर्शी ढांचे में तरल भरा है, जिसमें काई जैसी कोई वस्तु तैर रही है।
इस ढांचे को एल्गी ट्री कहा जाता है, जो शहर की दूषित हवा को स्वच्छ करने की कवायद का हिस्सा है। दावा है कि शैवालों से भरा यह कृत्रिम पेड़ हवा से कार्बनडाइआक्साइड को सोख लेगा।
भोपाल की कंपनी मशरूम वर्ल्ड ने नगर निगम के साथ मिलकर इसे प्रायोगिक तौर पर लगाया है। संस्था की विज्ञानी तनुप्रिया पटेल का कहना है इस एल्गी ट्री में विशेष प्रकार का सूक्ष्म शैवाल (एल्गी) भरा हुआ है। यह सूरज की रोशनी में प्रकाश संश्लेषण कर अपना पोषण करता है। इस प्रक्रिया में यह कार्बनडाइ आक्साइड अवशोषित करता है और आक्सीजन छोड़ता है।
जिस विशेष शैवाल का इसमें उपयोग हुआ वह सामान्य से कई गुना अधिक कार्बनडाइ आक्साइड अवशोषित करता है। एक एल्गी ट्री साल भर में एक टन कार्बनडाइ आक्साइड अवशोषित कर लेता है। इसमें सोलर पैनल और वाइफाइ आधारित निगरानी तंत्र लगाया गया है, जिससे इसके प्रदर्शन और डाटा की निगरानी की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि एल्गी के बायोमास के आधार पर यह मापा जाता है कि कितनी कार्बन डाइआक्साइड अवशोषित हुई और कितनी आक्सीजन उत्सर्जित हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैफिक जंक्शन, औद्योगिक क्षेत्रों, पार्किंग जोन और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों पर एल्गी ट्री बहुत उपयोगी हो सकता है।
कंपनी के अनुसार एक एल्गी ट्री प्रतिवर्ष उतनी कार्बन डाइआक्साइड अवशोषित करने की क्षमता रखता है, जितनी एक परिपक्व नीम या पीपल का पेड़ लगभग 25 वर्षों में कर पाता है।
क्या है यह शैवाल, जिसका इस तरह उपयोग
शैवाल ऐसी प्रकाश संश्लेषी जलीय वनस्पति है, जो पौधों की तरह भोजन बनाती है। इसे सेवार या काई भी कहा जाता है। हालांकि, कुछ काई वैक्टीरिया भी होते हैं। सूक्ष्म शैवाल की कुछ प्रजातियां 24 घंटे में अपनी संख्या दोगुना कर लेती हैं। एक किलोग्राम जैव भार बनाने में इसे 1.8 किलोग्राम कार्बनडाइ आक्साइड की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि यह पेड़-पौधों की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्रफल और प्रति इकाई समय, अधिक कार्बनडाइ आक्साइड अवशोषित कर लेता है। इसी कारण दुनियाभर में कार्बन कैप्चर तकनीकों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
स्वच्छ और टिकाऊ शहरी विकास का माडल
मशरूम वर्ल्ड ग्रुप के संचालक समीर सागर और शक्ति सागर का कहना है कि एल्गी ट्री जैसी तकनीकें देश के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने और स्वच्छ, टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। संस्था भविष्य में भोपाल, दिल्ली, पुणे, मुंबई के सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक परिसरों में भी इस तकनीक का विस्तार करने की योजना बना रही है, ताकि शहरों को अधिक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ बनाया जा सके।
इनडोर संस्करण पर काम जारी
इसी महीने पता चलेगा कितना कार्बन सोखा
कार्बन डाइआक्साइड अवशोषित करने में शैवाल बहुत महत्वपूर्ण हैं। यूरोपीय देशों में इस एल्गीट्री को बहुत सी जगहों पर लगाया गया है। कांक्रीट की अधिकता वाली जगहों पर जहां पेड़-पौधे नहीं लगाए जा सकते, वहां इसे इंस्टाल किया जा सकता है। इससे कम समय में अधिक हवा को शुद्ध किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों में अधिक उपयोगी है, जहां हरित क्षेत्र सीमित हैं और प्रदूषण का दबाव अधिक है।
-
देश6 months ago‘न्याय के साथ विकास’ से ‘Ease of Living’ तक: बिहार को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
-
विदेश6 months agoफर्जी डिग्री रैकेट पर ऑस्ट्रेलिया में हंगामा, भारतीय कार्रवाई का हवाला देकर सीनेटर मैल्कम रॉबर्ट्स ने छात्र वीज़ा सिस्टम पर उठाए सवाल
-
देश6 months ago2027 चुनाव से पहले पंजाब सीएम भगवंत मान का बड़ा राजनीतिक दांव
-
बिहार-झारखंड6 months agoखाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री
-
उत्तर प्रदेश6 months agoपूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जेल में बिगड़ी तबीयत, देवरिया से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
-
देश6 months agoराष्ट्रपति द्रौपादी मुर्मु का अमृतसर साहिब में भव्य स्वागत, CM भगवंत मान ने सिख मर्यादा व संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
-
पंजाब6 months agoमीडिया पर दबाव के आरोप, पंजाब की राजनीति में बढ़ा विवाद
-
दिल्ली6 months agoपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अमित शाह से करेंगे मुलाकात, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा



