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खुरालगढ़ में गुरु रविदास की 649वीं जयंती, 650वीं जयंती के लिए पंजाब सरकार ने शुरू किए साल-भर के कार्यक्रम

जालंधर: खुरालगढ़ में गुरु रविदास की 649वीं जयंती, 650वीं जयंती के लिए पंजाब सरकार ने शुरू किए साल-भर के कार्यक्रम

पंजाब के होशियारपुर जिले के ऐतिहासिक स्थल खुरालगढ़ में शुक्रवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर राज्य-स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर आम आदमी पार्टी सरकार ने गुरु रविदास की 650वीं जयंती को भव्य रूप से मनाने के लिए साल-भर चलने वाले आयोजनों की औपचारिक शुरुआत की।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अखंड पाठ के भोग से हुई, जिसके बाद धार्मिक प्रवचन और कीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने इस ऐतिहासिक अवसर पर खुरालगढ़ पहुंचकर गुरु रविदास को नमन किया।

सभा को संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में 20 फरवरी 2027 तक राज्य-भर में धार्मिक समागम और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि खुरालगढ़ स्थित गुरु रविदास मेमोरियल का विस्तार किया जाएगा और जालंधर के पास फरीदपुर (डेरा बल्लां के नजदीक) में श्री गुरु रविदास बाणी रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन आयोजनों की गरिमा और भव्यता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, और इसके लिए धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संत समाज के मार्गदर्शन में इन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगी।


“मैं खुद को इस संगत का विनम्र सहभागी मानता हूं” – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद को संगत का एक साधारण सहभागी बताते हुए कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी शताब्दी समारोह भी बड़े स्तर पर मनाए थे और उसी भावना के साथ अब गुरु रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम तय किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु रविदास की शिक्षाओं और दर्शन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में गुरु रविदास चेयर की स्थापना की है, ताकि उनके विचारों पर अकादमिक शोध को बढ़ावा दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि फरीदपुर और नौ गज़ा गांवों में 12 एकड़ जमीन ₹10 करोड़ की लागत से खरीदी गई है, जहां श्री गुरु रविदास बाणी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा।


संत समाज की भागीदारी, सरकार की पहल की सराहना

इस अवसर पर रविदासिया और आद-धर्मी समुदाय से जुड़े विभिन्न डेरों के प्रमुख संतों ने कार्यक्रम में भाग लिया। संत समाज ने गुरु रविदास की 649वीं जयंती और 650वीं जयंती के लिए घोषित साल-भर के आयोजनों को लेकर राज्य सरकार की खुले दिल से सराहना की।

श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय सोसाइटी के अध्यक्ष संत निर्मल दास जौरे वाले ने कहा कि संत समाज की ओर से मुख्यमंत्री को इस व्यापक और समर्पित योजना के लिए विशेष धन्यवाद दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु रविदास ने खुरालगढ़ में चार वर्षों से अधिक समय तक तपस्या और साधना की थी, जिससे यह भूमि अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

डेरा बल्लां से आए संत प्रदीप दास ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए डेरा बल्लां के पास रिसर्च सेंटर के लिए 10 एकड़ जमीन देने पर राज्य सरकार का आभार जताया।


माननीयों की उपस्थिति और प्रशासनिक इंतजाम

कार्यक्रम में AAP पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया, कई मंत्री, सांसद और विधायक भी मौजूद रहे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि उन्हें खुरालगढ़ जैसी पवित्र भूमि पर आने का सौभाग्य मिला है, जहां गुरु रविदास के चरण पड़े थे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष सरकारी बसों की व्यवस्था की गई, जिससे पंजाब के विभिन्न हिस्सों से लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकें।


डेरा बल्लां और धार्मिक पृष्ठभूमि

कार्यक्रम में शामिल अधिकतर संत गुरु ग्रंथ साहिब को मानते हैं। उल्लेखनीय है कि डेरा बल्लां, जहां 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविदास जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए थे, वहां “अमृत बाणी गुरु रविदास” नामक अलग ग्रंथ का अनुसरण किया जाता है। वर्ष 2010 में डेरा बल्लां द्वारा ‘रविदासिया’ धर्म की घोषणा की गई थी, हालांकि समुदाय के कई संतों और डेरों ने इसे स्वीकार नहीं किया और गुरु ग्रंथ साहिब की परंपरा को बनाए रखने का फैसला किया।


निष्कर्ष

खुरालगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल गुरु रविदास की शिक्षाओं को याद करने का अवसर बना, बल्कि पंजाब सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जिसके तहत सामाजिक समानता, भक्ति परंपरा और संतों की विचारधारा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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