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फर्जी फर्म व बैंक खातों से चल रहा था करोड़ों का सट्टा कारोबार, सागर पुलिस ने भोपाल के गिरोह का किया पर्दाफाश; छह गिरफ्तार

सागर पुलिस ने भोपाल से संचालित एक बड़े ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपित रोजगार दिलाने के नाम पर लोगों से उनके दस्तावेज हासिल करते और उन्हीं के नाम पर फर्जी फर्में पंजीकृत कर बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था।

पुलिस ने गिरोह के सरगना ऋषभ पटेल को भोपाल से गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख 42 हजार 700 रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस की जांच में अब तक करीब 30 फर्जी फर्मों और इनके बैंक खातों में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है।

एक शिकायत से खुली सट्टा नेटवर्क की परतें

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सोलंकी के अनुसार, 13 अगस्त को रोहित पटेल ने मकरोनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया।

जांच में ग्लैमर इंटरप्राइजेस नाम की फर्म का पता चला। इसके बैंक खाते में महज छह महीने के भीतर करीब 90 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया। पुलिस को संदेह हुआ कि यह रकम सामान्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी नहीं है।

घरेलू विवाद की शिकायत ने भी जोड़ी अहम कड़ी

इसी दौरान आरोपित सोनू दांगी की पत्नी ने गोपालगंज थाने में घरेलू हिंसा की शिकायत की। शिकायत में उसने बताया कि उसका पति उसे समय नहीं देता और कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता है। पुलिस ने शिकायत में सामने आई बैंक खातों से जुड़ी जानकारी को गंभीरता से लिया और साइबर टीम को जांच में लगाया। इसके बाद अलग-अलग खातों, फर्मों और आरोपितों के बीच कड़ियां जुड़ती चली गईं।

पूछताछ में सामने आया पूरा नेटवर्क

पुलिस ने सबसे पहले धर्मेंद्र नाहर और सोनू दांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में धर्मेंद्र ने बताया कि उसने भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से यह काम सीखा था। इसके बाद सोनू दांगी और अन्य साथियों के साथ मिलकर लोगों के दस्तावेजों पर फर्जी फर्में बनवाने और बैंक खाते खुलवाने का काम शुरू किया गया।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेंद्र पांडे और ऋषभ पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया। वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह अभी फरार हैं।

पुलिस ने अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को आठ दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

30 फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों का ट्रांजेक्शन

जांच के दौरान पुलिस को अब तक करीब 30 फर्जी फर्मों का पता चला है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेंद्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रानिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस, सौरभ इंटरप्राइजेस, माखन इंटरप्राइजेस, अंकेश इंटरप्राइजेस, तनविक इंटरप्राइजेस, यूनिक टूर एंड ट्रेवल्स, महाकाल ट्रेडर्स, मैक्स ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स और जय महाकाल टूर एंड ट्रेवल्स सहित अन्य नाम शामिल हैं।

इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों में अब तक 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है। पुलिस अब इन खातों और ट्रांजेक्शन की पड़ताल कर रही है।

ऑनलाइन वेबसाइटों के जरिए सट्टा खिलाने का खुलासा

पुलिस पूछताछ में ऋषभ पटेल ने कथित तौर पर बताया कि वह ऑनलाइन वेबसाइटों के माध्यम से सट्टा खिलाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं, फर्जी खातों का इस्तेमाल किन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किया गया और करोड़ों रुपये के लेन-देन का अंतिम सिरा कहां तक जाता है। फरार आरोपितों की तलाश भी जारी है।

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