बिहार-झारखंड
Buxar Bhagalpur Expressway: सिर्फ 4 घंटे में बक्सर से भागलपुर का सफर, दिल्ली से बंगाल जाना भी होगा आसान
बिहार सरकार ने हाल ही में 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफ्रील्ड एक्सप्रेस-वे (Buxar Bhagalpur Expressway) के निर्माण को मंजूरी दी है। यह एक्सप्रेस-वे दक्षिण बिहार के 13 जिलों की तस्वीर बदल देगा।
यह कोई सामान्य एक्सप्रेस-वे नहीं होगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़कर बंगाल बॉर्डर तक जाने वाला एक आधुनिक ‘एनर्जी और यूटिलिटी कॉरिडोर’ भी साबित होगा।
दक्षिण बिहार के 13 जिलों की चमकेगी किस्मत:
बिहार कैबिनेट की बुनियादी ढांचा रिपोर्ट के अनुसार, यह एक्सप्रेस-वे बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर से होकर गुजरेगा।
इस 336 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के बनने से न केवल बक्सर से भागलपुर का 10-12 घंटे का सफर घटकर 4-5 घंटे रह जाएगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से बंगाल जाना भी बेहद आसान हो जाएगा।
क्या है यूटिलिटी बेल्ट?
इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘एनर्जी व गैस यूटिलिटी बेल्ट’ के रूप में विकसित होना है। यह एक्सप्रेस-वे GAIL की नेचुरल गैस पाइपलाइनों और पावर ग्रिड की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के समानांतर आकार लेगा।
बता दें कि किसी भी बड़ी इंडस्ट्री को स्थापित करने के लिए तीन बुनियादी चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है- तेज परिवहन, निर्बाध बिजली और किफायती ऊर्जा।
इस ‘यूटिलिटी बेल्ट’ के बनने से इन्वेस्टर्स को गैस और इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड से जुड़ने के लिए अलग से भारी बुनियादी ढांचा नहीं बनाना पड़ेगा, जिससे उनकी लागत में भारी कमी आएगी।
एक्सप्रेस-वे में क्या होगा BIADA का रोल?
दरअसल, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) एक्सप्रेस-वे के इस नए नेटवर्क का पूरा फायदा उठाने के लिए दोनों ओर बड़े ‘लैंड बैंक’ विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
कैसे बनेंगे औद्योगिक गलियारे?
गैस पाइपलाइन और पावर ग्रिड की आसान पहुंच के कारण BIADA यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड-पार्क और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बना सकेगा।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन:
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे की एक और खास बात है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के जरिए दिल्ली-UP से सीधे जुड़ने के कारण यह पूरा रूट एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग कॉरिडोर में तब्दील हो जाएगा।
दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार:
एक्सप्रेस-वे के बाद औद्योगिक क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यहां माल ढुलाई और आसान हो जाएगी। इसी के साथ, दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे की लागत:
पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड इस एक्सप्रेस-वे को करीब 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
क्या एक्सप्रेस-वे पर लगेगा टोल?
यह पूरा प्रोजेक्ट DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित किया जाएगा, इसलिए एक्सप्रेस-वे चालू होने के बाद इसका इस्तेमाल करने वाले वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा।
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