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जब पुरुष पहनते हैं घाघरा-चोली, फिर ठेठ भोजपुरी गीतों पर लगाते हैं ठुमके, पूर्वांचल में ऐसे होता है ‘नटुआ नाच’

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बिहार की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। लेकिन इन सभी के बीच पूर्वांचल की भी अपनी अनोखी संस्कृति है, जिसका हिस्सा है यहां किया जाने वाला नटुआ नाच। पूर्वी यूपी में जब भी कोई शुभ अवसर होता है, शादी-ब्याह या तीज-त्योहार का माहौल होता है; उसमें नटुआ नाच जैसे जोश भर देने का काम करता है।

आइए आपको पूर्वांचल के इस अनोखे लोकनृत्य की कहानी बताते हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

लोकपरंपरा की खास पहचान है नटुआ नाच

नटुआ नाच भोजपुरी भाषी क्षेत्र का एक खास लोकनृत्य है, इसकी झलक बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों खासकर सोनभद्र में देखने को मिलती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें पुरुष नर्तक महिलाओं के कपड़े जैसे- घाघरा, चोली, साड़ी और ब्लाउज पहनकर यानी पूरी तरह से महिला की तरह बनकर थिरकते नजर आते हैं। इस नाच ने आज भी भोजपुरी नृत्य की संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है।

ऊर्जा और फुर्ती से दिखाते हैं प्रदर्शन

इसमें नर्तक नाचते हुए अपनी कलाबाजियां भी पेश करते हैं, जैसे- हवा में अचानक ऊंची छलांग लगाना, जमीन पर तेजी से घूमना और पिरामिड बनाना। यह सभी काम बड़ी ही फुर्ती और ऊर्जा के साथ किए जाते हैं। उनका कौशल के साथ बनाया गया संतुलन भी देखने लायक होता है।

नृत्य और नाटक का अनोखा मेल

इसे हम अकेले एक डांस फॉर्म नहीं कह सकते क्योंकि इसमें कलाकार आपको नाचने के साथ ही चेहरे के हाव-भाव और शारीरिक मुद्राओं की मदद से पूरी कहानी कहते नजर आएंगे। कभी ये कहानियां पौराणिक होती हैं, कभी इनमें गांव के जीवन का खट्टा-मीठा रंग दिखता है।

जब नृत्य होता है तो पुरुष घाघरा चोली पहनते हैं और जैसे ही नाच नाटक के फॉर्म में बदलता है, पुरुषों का भेष भी साड़ी और ब्लाउज में बदल जाता है। इस दौरान जो भोजपुरी गीत गाए जाते हैं, वो मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

मृदंग की थाप और कसावर की ताल पर होता है नृत्य

नटुआ नाच की असली जान मृदंग और कसावर वाद्य यंत्र हैं। जहां मृदंग की थाप से नृत्य का बेस तैयार होता है, तो वहीं कसावर की तीखी और खनकती ताल माहौल को उत्साह से भर देती है। जबकि नाटक के समय मृदंग की जगह ढोलक और कसावर की जगह सारंगी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, छढ़, जोड़ी और कसनहटी (घांटी) जैसे लोक वाद्ययंत्रों को भी उपयोग में लाया जाता है।

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