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उत्तर प्रदेश

सीएम योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने का चैलेंज क्यों दे रहे अखिलेश यादव? कौन है यहां से सपा कैंडिडेट

यूपी Tak के खास शो ‘आज का यूपी’ में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर में अयोध्या पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पवन पांडे के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या सदर सीट से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती और उनका ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ व ब्राह्मण कार्ड शामिल है. दूसरी बड़ी खबर सपा नेता पवन पांडे द्वारा PDA का नया मतलब ‘पीड़ित पंडित’ बताते हुए बीजेपी सरकार में ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाने और गोरखपुर स्नातक एमएलसी चुनाव में सपा के नए जातीय दांव से जुड़ी है. वहीं तीसरी बड़ी खबर में राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले तीन विधायकों (अभय सिंह, राकेश सिंह और विनोद चतुर्वेदी) की 14 अक्टूबर को बीजेपी में संभावित एंट्री और इसके चलते बीजेपी के अपने ही स्थानीय ब्राह्मण नेताओं (खब्बू तिवारी और चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी) के बीच पनप रहे असंतोष का पूरा विश्लेषण शामिल है.

पवन पांडे के मंच से अखिलेश की चुनौती और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’

उत्तर प्रदेश में इन दिनों धार्मिक आयोजनों के जरिए सियासी जमीन तलाशने की होड़ मची है. इसी कड़ी में अयोध्या में पूर्व मंत्री और सपा नेता पवन पांडे द्वारा आयोजित भागवत कथा के आठवें दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहुंचे. मंच भले ही धार्मिक था, लेकिन अखिलेश यादव का अंदाज पूरी तरह सियासी रहा. अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर बीजेपी को खुद पर इतना ही भरोसा है तो सीएम योगी खुद अयोध्या सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं.

अखिलेश यादव ने कहा कि जब से उन्होंने अयोध्या सदर सीट से पवन पांडे को सपा का उम्मीदवार घोषित किया है. बीजेपी तीन बार सर्वे करा चुकी है, लेकिन उसे कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं मिल रहा है. कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव हाथ में गदा और त्रिशूल थामे संत समाज और भगवाधारी साधुओं के बीच नजर आए.

सुदर्शन चक्र और कृष्ण-सुदामा का जिक्र

अखिलेश ने सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘प्रभु श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र सज्जनों की रक्षा के लिए होता है, डराने के लिए नहीं. सत्ताधीशों को सीखना चाहिए कि राज छल से नहीं, बल्कि प्रेम और जनमत से मिलता है.’

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव अयोध्या की धरती से ‘ठाकुर बनाम ब्राह्मण’ का नैरेटिव गढ़कर बीजेपी के मजबूत राजनीतिक गढ़ को भेदने की कोशिश कर रहे हैं.

अयोध्या से लेकर गोरखपुर तक सपा का ब्राह्मण कार्ड

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के बीच सपा नेता पवन पांडे ने पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वाले नारे को नया मोड़ देते हुए इसे “पीड़ित पंडित” का नाम दे दिया. पवन पांडे ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में सबसे ज्यादा उत्पीड़न और उपेक्षा का शिकार ब्राह्मण समाज हुआ है.

पवन पांडे ने सुल्तानपुर के डॉक्टर घनश्याम तिवारी हत्याकांड और गोरखपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में ब्राह्मण समाज खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस कर रहा है, इसलिए वह अब विकल्प के तौर पर अखिलेश यादव की तरफ उम्मीद से देख रहा है.

गोरखपुर स्नातक चुनाव में बड़ा फेरबदल: ब्राह्मणों को साधने की इसी रणनीति के तहत अखिलेश यादव ने गोरखपुर स्नातक एमएलसी चुनाव में बड़ा सियासी दांव खेला है. बीजेपी द्वारा ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिए जाने से नाराज चल रहे संजय त्रिपाठी को सपा ने अपने साथ मिला लिया है. अखिलेश ने अपने घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव का टिकट काटकर संजय त्रिपाठी को उम्मीदवार बना दिया है जिससे गोरखपुर-अयोध्या बेल्ट में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

सपा के बागी विधायकों की बीजेपी में एंट्री

राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से बगावत कर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने वाले तीन प्रमुख विधायक अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी की बीजेपी में आधिकारिक शामिल होने की पटकथा तैयार हो चुकी है. आगामी 14 अक्टूबर को गौरीगंज में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में इन तीनों नेताओं की बीजेपी में औपचारिक एंट्री की संभावना है. हालांकि बागियों की इस एंट्री से बीजेपी के भीतर ही असंतोष के सुर मुखर होने लगे हैं.

खब्बू तिवारी की नाराजगी: अयोध्या/गोशाईंगंज क्षेत्र से बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक खब्बू तिवारी, अभय सिंह की बीजेपी में बढ़ती नजदीकियों से असहज हैं. उनका खेमा लगातार इस घुसपैठ का विरोध कर रहा है.

गौरीगंज में मटियारी का संकट: गौरीगंज से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके चंद्रप्रकाश मिश्रा ‘मटियारी’ भी सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह के बीजेपी में आने की खबरों से दुखी हैं.

अगर बीजेपी सपा के इन बागी दिग्गजों को समायोजित करती है तो उसे अपने ही पुराने और वफादार कैडर, खासकर स्थानीय ब्राह्मण नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है जिसका सीधा फायदा उठाने की फिराक में समाजवादी पार्टी बैठी है.

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