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श्योपुर के जंगल में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव, वनकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, गाड़ियों के शीशे तोड़े

श्योपुर में जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। खाड़ी वन रेंज के मोरेका गांव के पास कार्रवाई के दौरान भीड़ ने वनकर्मियों पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना में बीट गार्ड और वनपाल समेत दो वनकर्मी घायल हुए हैं। हमले में विभाग की एक गाड़ी के शीशे भी टूट गए।

अचानक हुए हमले के बाद वन विभाग की टीम को कार्रवाई बीच में छोड़कर मौके से पीछे हटना पड़ा। घटना ने श्योपुर के जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण और वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5 हजार बीघा से ज्यादा जंगल साफ करने का आरोप

बताया जा रहा है कि मोरेका और टर्राकलां गांव के आसपास करीब 5 हजार बीघा से अधिक वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कर जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। आरोपितों द्वारा पेड़ों के कटे हुए तनों को आग लगाकर नष्ट किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

बुधवार को वन विभाग की टीम जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची थी। टीम ने अस्थायी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू ही की थी कि वहां मौजूद लोगों ने एकजुट होकर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ ने वनकर्मियों पर पथराव कर दिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

हमले में दो वनकर्मी घायल, वाहन भी क्षतिग्रस्त

हमले के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने का आरोप है। बीट गार्ड और वनपाल समेत दो कर्मचारी घायल हुए हैं। वहीं, पथराव में विभाग की एक गाड़ी के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए।

स्थिति बिगड़ती देख वन विभाग की टीम ने मौके से हटना ही बेहतर समझा। इस कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।

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एक साल पहले भी हुआ था हमला

मोरेका-टर्राकलां क्षेत्र में जंगल की जमीन पर अतिक्रमण का यह मामला नया नहीं है। करीब एक साल पहले भी वन विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। उस दौरान भी वनकर्मियों पर हमला कर उन्हें मौके से खदेड़ने का आरोप लगा था।

करीब एक साल बाद वन विभाग ने दोबारा कार्रवाई शुरू की, लेकिन इस बार भी टीम को विरोध और हमले का सामना करना पड़ा। लगातार दूसरी बार कार्रवाई प्रभावित होने से वन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जंगल की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर लगातार पेड़ों की कटाई और वनभूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों के बीच वन विभाग की टीम पर हमला गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सवाल यह भी है कि यदि अतिक्रमणकारी सरकारी अमले पर ही हमला कर कार्रवाई रोकने लगेंगे, तो जंगल की जमीन को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण और जंगल की अवैध कटाई का मुद्दा उच्च स्तर पर भी उठाया गया है। अब जरूरत इस बात की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान वन अमले को पर्याप्त सुरक्षा और पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्रवाई प्रभावी ढंग से पूरी हो सके।

पुलिस सहयोग के बिना कार्रवाई मुश्किल

घटना ने वन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय की जरूरत को भी सामने ला दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, जबकि वनभूमि और जंगल की सुरक्षा वन विभाग के जिम्मे है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी जरूरी मानी जा रही है।

यदि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ समय रहते सख्त और समन्वित कार्रवाई नहीं हुई, तो श्योपुर के जंगलों में अवैध कब्जे और पेड़ों की कटाई का सिलसिला और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

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