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‘विकसित बिहार’ की दिशा आज होगी तय, 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

‘विकसित बिहार’ की दिशा आज होगी तय, 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश, रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर रहेगा फोकस

बिहार के विकास की दिशा तय करने वाला अहम दिन आज है। राज्य सरकार आज Bihar Legislative Assembly में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करने जा रही है। इस बजट को राज्य के “विकसित बिहार” विजन की नींव माना जा रहा है, जिसमें रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है।

बजट सत्र की शुरुआत सुबह प्रश्नकाल से हुई, जिसमें विधायकों ने सरकार से जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे। इसके बाद वित्त मंत्री द्वारा दोपहर में बजट पेश किया जाएगा। यह बजट न सिर्फ आगामी वित्त वर्ष की आय-व्यय का लेखा-जोखा होगा, बल्कि यह बताएगा कि आने वाले वर्षों में बिहार किस विकास पथ पर आगे बढ़ेगा।

राज्य सरकार के इस बजट से आम जनता को काफी उम्मीदें हैं। खासतौर पर युवा वर्ग रोजगार को लेकर, महिलाएं सशक्तिकरण योजनाओं को लेकर और किसान कृषि सहायता व सिंचाई सुविधाओं को लेकर बजट पर नजर लगाए हुए हैं। माना जा रहा है कि इस बार का बजट आकार पहले की तुलना में और बड़ा हो सकता है, जिससे सरकार की विकासात्मक प्राथमिकताओं का दायरा भी व्यापक होगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बजट में सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में विकास पहुंचाने, पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

बिहार लंबे समय से बेरोजगारी और पलायन की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में इस बजट में रोजगार को सबसे बड़ा एजेंडा माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी निवेश, स्टार्ट-अप्स और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर युवाओं को राज्य में ही काम के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

बजट में स्किल डेवलपमेंट, आईटी-हब, औद्योगिक पार्क और छोटे-मझोले उद्योगों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं हो सकती हैं। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी नई योजनाओं की संभावना जताई जा रही है।

इस बजट में महिला सशक्तिकरण को भी अहम स्थान मिलने की उम्मीद है। सरकार पहले ही महिलाओं के लिए आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों और आर्थिक सहायता योजनाओं के जरिए कई कदम उठा चुकी है। अब बजट के माध्यम से इन योजनाओं को और मजबूत करने की तैयारी है।

महिलाओं के लिए स्वरोजगार, लघु उद्योग, प्रशिक्षण केंद्र और वित्तीय सहायता से जुड़ी नई घोषणाएं हो सकती हैं। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी महिलाओं को केंद्र में रखकर नीतियां बनाने की संभावना है।

बिहार की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, इसलिए ग्रामीण विकास बजट का एक अहम हिस्सा रहने वाला है। सड़कों का निर्माण, बिजली आपूर्ति, पेयजल, सिंचाई और कृषि से जुड़ी योजनाओं के लिए बड़े प्रावधान किए जा सकते हैं।

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, भंडारण सुविधा, फसल बीमा और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर भी बजट में फोकस रहने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा हों, ताकि लोगों को शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।

राज्य के समग्र विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है। बजट में स्कूलों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार पर ध्यान दिया जा सकता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ बनाने और मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सुविधाओं के लिए नई योजनाओं की घोषणा संभव है।

बजट सत्र को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। विपक्षी दलों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे सरकार से बेरोजगारी, महंगाई और विकास के मुद्दों पर जवाब मांगेंगे। उनका कहना है कि बजट सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव दिखना चाहिए।

वहीं सरकार का दावा है कि यह बजट विकास-उन्मुख और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला होगा। सत्ता पक्ष का कहना है कि पिछले वर्षों में किए गए कामों का असर अब दिखने लगा है और यह बजट उस प्रक्रिया को और तेज करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2026-27 का बजट आर्थिक दृष्टि से भी काफी अहम है। केंद्र सरकार की नीतियों, राज्यों को मिलने वाले अनुदान और निवेश माहौल को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने अपनी वित्तीय रणनीति तैयार की है।

राजस्व बढ़ाने, खर्च को संतुलित रखने और विकास योजनाओं को गति देने के लिए बजट में कई संरचनात्मक सुधारों की झलक मिल सकती है।

बजट पेश होने के बाद इस पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होगी। अलग-अलग विभागों के बजट पर बहस के बाद इसे पारित किया जाएगा। इसके बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—घोषणाओं को समय पर लागू करना और उनका लाभ आम जनता तक पहुंचाना।

कुल मिलाकर, आज पेश होने वाला बजट बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। यह तय करेगा कि “विकसित बिहार” सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा या वास्तव में धरातल पर उतरता दिखाई देगा।

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