मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार), 21 फरवरी 2026।
ब्रिटेन सरकार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल नीति से जुड़े मंत्री Kanishka Narayan करीब 25 साल बाद अपने पैतृक शहर मुज़फ़्फ़रपुर पहुंचे। यह दौरा निजी था, लेकिन इसका प्रभाव राजनीतिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अपने गांव और शहर की गलियों में लौटते हुए वे भावुक नजर आए और युवाओं को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया—“आने वाला दशक भारत का होगा, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में।”
कनिष्क नारायण का जन्म बिहार में हुआ था। बचपन के शुरुआती वर्ष उन्होंने यहीं बिताए, लेकिन किशोरावस्था में उनका परिवार ब्रिटेन चला गया। वहीं उन्होंने शिक्षा हासिल की, सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और धीरे-धीरे ब्रिटिश राजनीति में अपनी पहचान बनाई। आज वे यूके सरकार में AI और टेक्नोलॉजी से जुड़े महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
25 साल बाद जब वे अपने गांव लौटे तो स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। पुराने परिचितों, शिक्षकों और ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि “जड़ों से जुड़ाव इंसान को जमीन से जोड़े रखता है। चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाएं, अपनी मिट्टी की खुशबू अलग ही होती है।”
मुज़फ़्फ़रपुर के एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और यही देश की सबसे बड़ी ताकत है। अगर इस युवा शक्ति को सही दिशा और तकनीकी प्रशिक्षण मिले तो भारत वैश्विक AI क्रांति का नेतृत्व कर सकता है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बताया। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सुरक्षा और प्रशासन—हर क्षेत्र में AI की भूमिका बढ़ेगी। भारत के पास विशाल डेटा, प्रतिभाशाली इंजीनियर और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जो इसे AI के क्षेत्र में आगे ले जा सकता है।
अपने संबोधन में कनिष्क नारायण ने भारत और ब्रिटेन के बीच तकनीकी साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शी डिजिटल ढांचे को महत्व देते हैं। ऐसे में AI नीति, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन सेफ्टी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएँ हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत और यूके संयुक्त शोध, स्टार्टअप सहयोग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं। उनका कहना था कि “भारत सिर्फ टेक टैलेंट का स्रोत नहीं है, बल्कि भविष्य का इनोवेशन हब बनने की क्षमता रखता है।”
अपने गृह राज्य को लेकर उन्होंने विशेष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि अवसरों की आवश्यकता है। यदि यहां तकनीकी शिक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए तो यह राज्य भी राष्ट्रीय तकनीकी विकास में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे सिर्फ नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नई तकनीकों को सीखकर उद्यमिता की ओर भी कदम बढ़ाएं। “AI सिर्फ बड़े शहरों की चीज नहीं है। छोटे शहरों और गांवों से भी वैश्विक स्तर के इनोवेशन निकल सकते हैं,” उन्होंने कहा।
कनिष्क नारायण ने AI के विकास के साथ-साथ उसके नैतिक उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उतनी ही जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। फेक न्यूज, डेटा प्राइवेसी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों से निपटने के लिए सख्त नीतियों और जागरूकता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत यदि AI में वैश्विक नेतृत्व चाहता है तो उसे टेक्नोलॉजी के साथ नैतिकता और पारदर्शिता को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने डिजिटल सुरक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया।
उनके दौरे को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर और आसपास के क्षेत्रों में खासा उत्साह देखा गया। कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकला व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है और फिर अपनी जड़ों से जुड़ने लौट सकता है।
स्थानीय युवाओं ने कहा कि उनका संबोधन उन्हें नई दिशा देने वाला था। कई छात्रों ने AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा जताई।
अपने संबोधन के अंत में कनिष्क नारायण ने कहा कि आने वाले 10 से 15 वर्षों में भारत दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम, आईटी सेक्टर और नीति निर्माण की गति इसे वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति दिलाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की वैश्विक पहचान अब सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की तकनीकों—AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल गवर्नेंस—में भी देश नई ऊंचाइयों को छुएगा।
25 साल बाद अपने पैतृक शहर लौटे कनिष्क नारायण का यह दौरा भावनात्मक होने के साथ-साथ दूरगामी संदेश देने वाला भी रहा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत के पास संसाधन, प्रतिभा और इच्छाशक्ति—तीनों मौजूद हैं। जरूरत है तो सही दिशा, नीति समर्थन और वैश्विक सहयोग की।
उनका यह बयान कि “भारत AI के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है” न सिर्फ युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि नीति निर्माताओं के लिए भी एक संकेत है कि तकनीक के इस दौर में भारत के पास ऐतिहासिक अवसर मौजूद है।