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जेल से रिहा होकर विधानसभा पहुंचे बाहुबली अनंत सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, सियासी हलकों में मचा हलचल
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब कुख्यात बाहुबली नेता और विधायक Anant Singh जेल से रिहा होने के बाद सीधे Bihar Legislative Assembly पहुंचे। विधानसभा परिसर में जो दृश्य देखने को मिला, उसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी। अनंत सिंह ने सदन में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री Nitish Kumar के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तेजी से वायरल हो रहा है।

लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अनंत सिंह की रिहाई पहले से ही चर्चा में थी। जैसे ही वे जेल से बाहर आए, उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। रिहाई के बाद उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कदम विधानसभा पहुंचना रहा, जहां उन्होंने विधायक के रूप में शपथ ग्रहण की औपचारिकताएं पूरी कीं।
विधानसभा में अनंत सिंह की मौजूदगी ने माहौल पूरी तरह बदल दिया। जैसे ही वे सदन में पहुंचे, सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की निगाहें उन पर टिक गईं। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास जाकर उनके पैर छुए, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार, सम्मान और संभावित सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अनंत सिंह द्वारा नीतीश कुमार के पैर छूने का वीडियो सामने आते ही राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। समर्थक इसे “बदलते रिश्तों” और “सम्मान की राजनीति” का संकेत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक मजबूरी और समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल व्यक्तिगत सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा सियासी संकेत भी छिपा हो सकता है। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव और बाहुबल का हमेशा से अहम रोल रहा है, और अनंत सिंह जैसे नेताओं की हर गतिविधि को इसी नजरिए से देखा जाता है।
अनंत सिंह बिहार के सबसे चर्चित और विवादित नेताओं में गिने जाते हैं। मोकामा क्षेत्र से उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है। उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिसके चलते वे लंबे समय तक जेल में भी रहे। इसके बावजूद उनका जनाधार कमजोर नहीं पड़ा और वे चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे।
उनकी राजनीति हमेशा से ताकत, दबदबा और क्षेत्रीय प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में जेल से रिहाई के बाद उनका यह पहला सार्वजनिक राजनीतिक कदम खास मायने रखता है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, विधानसभा में मौजूद लोगों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सहजता के साथ अनंत सिंह का अभिवादन स्वीकार किया। नीतीश कुमार आमतौर पर सार्वजनिक मंचों पर संयमित और संतुलित व्यवहार के लिए जाने जाते हैं, और इस मौके पर भी उन्होंने वही रुख अपनाया।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार हर राजनीतिक कदम को बेहद सोच-समझकर उठाते हैं, और ऐसे में अनंत सिंह के इस कदम को वे कैसे देखते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट हो सकता है।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जिन नेताओं पर गंभीर आपराधिक आरोप रहे हैं, उनका इस तरह विधानसभा में स्वागत और मुख्यमंत्री से नजदीकी दिखाना गलत संदेश देता है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार “सुशासन” की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में बाहुबलियों और विवादित नेताओं को राजनीतिक संरक्षण मिलता दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे दृश्य जनता के बीच गलत उदाहरण पेश करते हैं।
वहीं, अनंत सिंह के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने विधानसभा की गरिमा के अनुरूप व्यवहार किया और मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान जताया। समर्थकों के अनुसार, यह कदम राजनीतिक परिपक्वता और अनुभव का प्रतीक है, न कि किसी दबाव या मजबूरी का।
उनका यह भी कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं
इस पूरे घटनाक्रम को बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में राज्य की राजनीति में नए गठजोड़, समर्थन और रणनीतियां सामने आ सकती हैं। अनंत सिंह का विधानसभा में सक्रिय होना और मुख्यमंत्री के प्रति सार्वजनिक सम्मान दिखाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां क्षेत्रीय नेताओं का प्रभाव गहरा होता है, वहां इस तरह की घटनाएं केवल प्रतीकात्मक नहीं होतीं, बल्कि भविष्य की राजनीति की झलक भी देती हैं।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे भारतीय राजनीति की परंपरा और सम्मान की संस्कृति बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सत्ता और बाहुबल के गठजोड़ का उदाहरण मान रहे हैं।
आम जनता के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे नेताओं की राजनीति में वापसी से राज्य की छवि पर असर पड़ेगा, या फिर यह लोकतंत्र की स्वीकार्यता का हिस्सा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अनंत सिंह विधानसभा में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और सरकार के साथ उनके संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। क्या वे सत्ता पक्ष के लिए अहम सहयोगी बनेंगे, या फिर स्वतंत्र राजनीतिक लाइन अपनाएंगे—यह आने वाला वक्त बताएगा।
फिलहाल इतना तय है कि जेल से बाहर आते ही विधानसभा में मुख्यमंत्री के पैर छूने का यह दृश्य बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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