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जीएसटी अधिकारियों ने ऑल इंडिया फर्नेस एसोसिएशन के प्रमुख केके गर्ग को लुधियाना में गिरफ्तार किया

जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने कथित तौर पर एक फर्जी बिलिंग घोटाले में लुधियाना में ऑल इंडिया फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष केके गर्ग और उनके बेटे को गिरफ्तार किया है।

इस गिरफ्तारी से लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ के उद्योगपतियों, विशेष रूप से इस्पात उद्योग में काम करने वाले उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों ने बताया कि केके गर्ग को डीजीजीआई ने कल पूछताछ के लिए उठाया था लेकिन कल देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, विभाग किसी भी घटनाक्रम पर चुप्पी साध रहा है।

द ट्रिब्यून से बात करते हुए वर्ल्ड एमएसएमई के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने आरोप लगाया कि राजस्व जुटाने के लिए जीएसटी अधिकारियों का यह निरंकुश कदम है।

उन्होंने कहा, ‘हमने सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 16 (2) और धारा 158 के बीच टकराव और उद्योग पर इसके प्रतिकूल प्रभाव के बारे में केंद्रीय वित्त मंत्री, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार को लिखा है। मान लीजिए कि कोई खरीदार किसी डीलर से स्क्रैप खरीदता है, तो वह मानदंडों के अनुसार बिलों का भुगतान करेगा, लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि स्क्रैप डीलर को सामग्री कहां से मिली। डीलर तीसरा या चौथा खरीदने वाला पक्ष हो सकता है। अब बाकी तीन पार्टियों ने क्या किया है, अगर उन्होंने टैक्स चोरी की होती या फर्जी बिलों पर खरीदारी की होती तो एक सच्चे खरीदार को इसके बारे में कैसे पता चलेगा जब उसने सरकार को सब कुछ दे दिया होगा। लेकिन विभाग अंतिम खरीदार पर पकड़ मजबूत कर लेता है और वह बलि का बकरा बन जाता है। केके गर्ग के साथ भी ऐसा ही हुआ है, “बदीश जिंदल ने आरोप लगाया।

मंडी गोबिंदगढ़ के फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने विभाग की ‘धौंस जमाने की रणनीति’ पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि जीएसटी की धारा 16-2 सी उद्योग के खिलाफ है और विभाग ज्यादती कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास सामग्री बेचने वाले व्यक्ति के बिल हैं और हम पारदर्शी तरीके से कारोबार कर रहे हैं। लेकिन अगर कुछ काली भेड़ों ने अनैतिक तरीके से सामग्री बेची है और अब कारोबार बंद कर दिया है या धोखाधड़ी करने के बाद उनका पता नहीं चल पा रहा है, तो हमें इसके लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जाना चाहिए? यह विभाग का कर्तव्य है कि वह डिफॉल्टरों के खिलाफ व्हिप चलाए, वास्तविक कारोबारियों को दंडित क्यों किया जा रहा है?” गुप्ता ने कहा, जिन्होंने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी, लेकिन इसका आज तक कोई सार्थक परिणाम नहीं आया है।

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