बिहार-झारखंड
बंगाल से बंगाल का सफर होगा आसान, किशनगंज बाईपास को मिली मंजूरी; बिहार से गुजरने की मजबूरी खत्म
उत्तर बंगाल से दक्षिण बंगाल जाने वाले लोगों को अब बीच में बिहार के किशनगंज से होकर गुजरने की मजबूरी नहीं रहेगी। केंद्र सरकार ने करीब 25 किलोमीटर लंबे फोरलेन किशनगंज ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
मंजूरी मिलने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बाईपास बनने के बाद बंगाल से बंगाल जाने वाले वाहनों को बिहार में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा।
प्रस्तावित बाईपास किशनगंज से करीब आठ किलोमीटर दूर बंगाल के हैटवार से शुरू होकर करीब पांच किलोमीटर दूर बंगाल के घरढ़पा तक बनेगा।
घरढ़पा के पास यह मार्ग एनएच-27 से जुड़ेगा, जहां से वाहन सिलीगुड़ी की ओर जा सकेंगे। इससे रायगंज, इस्लामपुर और चोपड़ा समेत उत्तर बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से सिलीगुड़ी की ओर जाने वाले वाहनों को किशनगंज के करीब तीन किलोमीटर हिस्से से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
किशनगंज पार किए बिना पहुंचेंगे सिलीगुड़ी
वर्तमान में उत्तर बंगाल के कई हिस्सों से सिलीगुड़ी की ओर जाने वाले वाहनों को बंगाल से निकलकर बिहार के किशनगंज में प्रवेश करना पड़ता है। एनएच-27 के करीब तीन किलोमीटर हिस्से को पार करने के बाद उन्हें दोबारा बंगाल में प्रवेश करना पड़ता है।
प्रस्तावित बाईपास बनने के बाद वाहन हैटवार से सीधे बाईपास पर आएंगे और घरढ़पा में निकलकर एनएच-27 के रास्ते सिलीगुड़ी की ओर बढ़ जाएंगे। इससे उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच आवागमन अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
सीमा जांच से भी मिलेगी राहत
किशनगंज होकर बंगाल आने-जाने वाले वाहनों को बिहार-बंगाल सीमा पर नियमित जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण उत्पाद विभाग और पुलिस की ओर से एनएच-27 पर नाका जांच और वाहन जांच अभियान चलाया जाता है। इस दौरान शराब से जुड़े मामलों में कार्रवाई भी होती रही है।
बंगाल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने वाले यात्रियों के लिए किशनगंज का करीब तीन किलोमीटर हिस्सा बीच में पड़ने के कारण उन्हें इस जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लंबे समय से बंगाल के लोगों की मांग रही है कि दोनों हिस्सों के बीच सीधा वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो, ताकि आवागमन अधिक सुगम हो सके।
बाईपास बनने के बाद बंगाल से बंगाल जाने वाले वाहनों को बिहार के इस हिस्से में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग मिलने के साथ जांच के कारण होने वाली संभावित देरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
रायगंज सांसद ने केंद्र के समक्ष उठाया था मुद्दा
रायगंज सांसद कार्तिक चंद्र पाल ने किशनगंज बाईपास निर्माण का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने बताया कि रायगंज से इस्लामपुर और चोपड़ा जाने वाले लोगों को किशनगंज होकर गुजरना पड़ता था। बीच में बिहार का हिस्सा पड़ने के कारण उन्हें सीमा जांच समेत कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।
सांसद ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से बाईपास निर्माण की मांग की थी। केंद्र ने मांग को स्वीकार करते हुए किशनगंज ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण को मंजूरी दी है।
सड़क बनने के बाद उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा बंगाल के लोगों को बंगाल के ही एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए बिहार में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा।
कोसी-सीमांचल के लोगों को भी होगा फायदा
किशनगंज बाईपास का लाभ केवल बंगाल के यात्रियों को ही नहीं मिलेगा। कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को भी इसका फायदा होगा। इन क्षेत्रों से सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल जाने वाले वाहन बंगाल में प्रवेश करने के बाद इसी मार्ग का इस्तेमाल कर सकेंगे।
बाईपास बनने से बंगाल की ओर जाने वाले वाहनों के लिए आवागमन सुगम होने के साथ किशनगंज शहर और एनएच-27 पर यातायात का दबाव भी कम होने की संभावना है।
25 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन बाईपास से उत्तर बंगाल-सिलीगुड़ी और दक्षिण बंगाल के बीच सीधा संपर्क बेहतर होगा। वहीं, बंगाल से बंगाल जाने वाले यात्रियों को बिहार के किशनगंज होकर गुजरने की मजबूरी भी खत्म हो जाएगी।
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