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बिहार-झारखंड

छपरा के निचले इलाकों में बाढ़ का तांडव, कई मोहल्लों के घरों में घुसा पानी; नाव से सामान निकाल रहे लोग

 कहीं घरों में घुटनों तक पानी, तो कहीं गृहस्थी समेटकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश। छपरा शहर के निचले इलाकों में गुरुवार की सुबह लोगों की आंख खुली तो घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका था। सारण तटबंध टूटने और गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है।

नेवाजी टोला धर्मशाला, नई बस्ती, सीढ़ी घाट, रूपगंज और रावल टोला समेत कई मोहल्लों में पानी फैल गया है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। घरों में पानी घुसने से अनाज, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं के बर्बाद होने का खतरा है।

नाव से सामान निकालकर सुरक्षित ठिकाने पर जा रहे लोग

बाढ़ का पानी जमुना महतो, अशोक कुमार, अरुण कुमार, मिथिलेश कुमार, भोला महतो, जयनाथ महतो, धर्मनाथ महतो और महेंद्र महतो समेत कई लोगों के घरों में घुस गया है। प्रभावित परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।

नेवाजी टोला धर्मशाला और नई बस्ती के लोग नाव के सहारे अपना सामान निकाल रहे हैं। कई परिवार शहर से सटे सोनापट्टी और अड्डा नंबर दो के पास सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं।

सरकारी बाजार और सब्जी मंडी पर भी खतरा

गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में शहर के अन्य निचले इलाकों में भी पानी फैलने की आशंका है। स्थिति ऐसी ही रही तो सरकारी बाजार, सब्जी मंडी और साहेबगंज तिकोनिया की दुकानों तक बाढ़ का पानी पहुंच सकता है। इससे कारोबार प्रभावित होने के साथ दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

रात में अचानक बढ़ा पानी, सुबह घरों में घुसा

नेवाजी टोला धर्मशाला निवासी अशोक कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह से ही पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। रात में अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। गुरुवार की सुबह तक पानी घरों में प्रवेश कर गया। उल्लेखनीय है कि नेवाजी टोला धर्मशाला और नई बस्ती का इलाका रिविलगंज प्रखंड के अंतर्गत आता है। यहां के लोगों को एक बार फिर बाढ़ की मार झेलनी पड़ रही है।

मुखिया ने प्रशासन से मांगी मदद

दिलिया रहीमपुर पंचायत के मुखिया विशुन साह ने जिला प्रशासन से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घरों में पानी घुसने से अनाज और घरेलू सामान बर्बाद हो रहे हैं। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। दो सितंबर को भी अचानक बाढ़ का पानी इस इलाके में घुसा था।

अब 30 सितंबर की रात फिर पानी आने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए नाव, अनाज, तिरपाल और भोजन की व्यवस्था करने की मांग की है।

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