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उत्तर प्रदेश

अजय राय छोड़ देंगे कांग्रेस? दलित नेता से विवाद, राहुल गांधी मनाएंगे या बीजेपी में होगी घर वापसी!

उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के दौरान हुई कहासुनी और मारपीट के बाद पार्टी के भीतर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की नाराजगी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. चर्चा है कि क्या वह कांग्रेस से दूरी बना सकते हैं या पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देकर मनाने की कोशिश करेगा. ममता चौधरी ने भी अजय राय के खिलाफ शिकायत करने की बात कही है. दूसरी ओर, पार्टी के अंदर यह चर्चा भी है कि उन्हें किसी दूसरे राज्य का प्रभारी बनाया जा सकता है. गुजरात की जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें भी हैं, जबकि उनकी बीजेपी में वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, अजय राय के कांग्रेस छोड़ने या किसी दूसरी पार्टी में जाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है.

अजय राय को लेकर कांग्रेस में क्यों उठ रहे सवाल?

यूपी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अजय राय की नाराजगी को लेकर चर्चा तेज है. विवाद के बीच कुछ लोग अजय राय और उनके समर्थकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि कुछ नेता ममता चौधरी और नए प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. इसी बीच सोमवार को राहुल गांधी की ओर से कांग्रेस नेताओं को सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित विरोध मार्च के लिए दिल्ली बुलाए जाने के बावजूद अजय राय के शामिल नहीं होने की बात भी चर्चा में है. इसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, उनके शामिल नहीं होने की वजह को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या अजय राय पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं और क्या इस विवाद का असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा.

बनारस की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं अजय राय

अजय राय वाराणसी यानी बनारस की राजनीति से आते हैं और अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वह बीजेपी के टिकट पर तीन बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. अब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटाए जाने के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. उन्हें करीब से जानने वाले कुछ लोगों का मानना है कि अजय राय अपने राजनीतिक फैसले खुद लेने के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि वह कांग्रेस में बने रहते हैं या अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए कोई दूसरा रास्ता चुनते हैं. फिलहाल, इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

ममता चौधरी और अजय राय के बीच पहले से अनबन की चर्चा

ममता चौधरी और अजय राय के बीच पहले से मतभेद होने की बात कही जा रही है. कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के कार्यभार संभालने के दौरान पार्टी कार्यालय में हुई कहासुनी और मारपीट के बाद यह विवाद और बढ़ गया. इस घटना में गाली-गलौज और जूता-चप्पल चलने की बात सामने आई थी. घटना के बाद पार्टी के भीतर जिम्मेदारी तय करने को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. विवाद ने ऐसे समय तूल पकड़ा है, जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद संगठन के लिए चर्चा का विषय बन गए हैं.

ममता चौधरी राहुल गांधी से करेंगी शिकायत

ममता चौधरी ने अजय राय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राहुल गांधी और राजेंद्र पाल गौतम से शिकायत करने की बात कही है. उनका आरोप है कि अजय राय पहले भी दलित विरोधी रवैया अपनाते रहे हैं. ममता चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि बैठकों के दौरान दलित नेताओं के बैठने के लिए उचित व्यवस्था नहीं की जाती थी. ये ममता चौधरी की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिन पर अजय राय का पक्ष इस जानकारी में सामने नहीं आया है. इस मामले में शिकायत की बात सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर विवाद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. अब देखना होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे मामले को किस तरह संभालता है और दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं

क्या अखिलेश यादव से खटास बनी अजय राय की नाराजगी की वजह?

अजय राय की नाराजगी को लेकर एक चर्चा समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन से भी जुड़ी है. राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि अखिलेश यादव और अजय राय के बीच संबंध सहज नहीं रहे हैं. वहीं, प्रमोद तिवारी और आराधना मिश्रा को समाजवादी पार्टी के साथ बेहतर तालमेल के लिहाज से अहम माना जाता है. इसी आधार पर चर्चा है कि गठबंधन की राह आसान करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बदलाव किया. हालांकि, अजय राय को इसी वजह से हटाए जाने या उनके नाराज होने की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है. अजय राय को बिना बताए पद से हटाए जाने और इससे उनके सम्मान को ठेस पहुंचने की चर्चा भी हो रही है. ऐसे में पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं.

बीजेपी में वापसी के भी कयास

कांग्रेस के भीतर एक चर्चा यह भी है कि अजय राय को किसी दूसरे राज्य का प्रभारी बनाकर नई जिम्मेदारी दी जा सकती है. कुछ नेताओं के बीच गुजरात का प्रभारी बनाए जाने की संभावना पर भी बात हो रही है. इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अजय राय की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई को वजह बताया जा रहा है. अजय राय वाराणसी में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं. दूसरी ओर, उनकी बीजेपी में वापसी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि, इनमें से किसी भी संभावना पर पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें मनाने के लिए कोई नई जिम्मेदारी देगा या अजय राय खुद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई फैसला करेंगे.

पिंडरा की सीट पर भी अजय राय की नजर?

अजय राय के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा का एक पहलू वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट भी है. दी गई जानकारी के मुताबिक वह इस बार पिंडरा से चुनाव जीतने की कोशिश में हैं. अजय राय वाराणसी की एक विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. ऐसे में उनके सामने यह सवाल भी है कि वह कांग्रेस में रहकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करेंगे या किसी दूसरे विकल्प पर विचार करेंगे. इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा के कार्यभार ग्रहण समारोह में हुई घटना पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अब दफ्तरों और कागजों तक सीमित रह गई है और ऐसी घटनाओं से अपने अस्तित्व का एहसास कराने की कोशिश करती है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अजय राय की नाराजगी दूर होती है या कांग्रेस के भीतर यह विवाद आगे भी जारी रहता है.

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