उत्तर प्रदेश
कौन हैं दीपिका आनंद जिन्हें बताया जा रहा बसपा का भविष्य, मायावती क्यों मानती हैं इन्हें अपना लकी चार्म?
आकाश आनंद को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से बाहर किए जाने के बाद अब मायावती के परिवार से एक और नाम सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. यह नाम है दीपिका आनंद का, जिनका जिक्र बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुद अपने ताजा सोशल मीडिया पोस्ट में किया है. परिवारवाद के खिलाफ अपनी पुरानी लाइन को दोहराते हुए मायावती ने साफ किया है कि अगर भविष्य में उनके भाई आनंद कुमार को किसी सदस्य की मदद की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं.
कौन हैं दीपिका आनंद?
दीपिका आनंद, मायावती के छोटे भाई और बीएसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं. दीपिका को बुआ मायावती का ‘लकी चार्म’ भी कहा जाता है और वे मायावती की काफी लाडली रही हैं. दीपिका का जन्म 2007 में हुआ था और उसी साल बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, जिसमें मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं.
मायावती ने अपने पोस्ट में क्या लिखा?
वीते शनिवार को जारी अपने ताजा पोस्ट में मायावती ने आकाश आनंद और उनके भाई ईशान आनंद दोनों को किसी भी राजनीतिक जिम्मेदारी से सिरे से खारिज कर दिया. मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा:
आगे दीपिका आनंद का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया:
“यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुए श्री आनंद कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की जरूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनीतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद को जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे जरूरत के मुताबिक अपनी खुद की जिम्मेवारी भी सौंप सकते हैं. लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर इनके युवा बच्चों में से किसी को भी यह जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे.”
क्या हैं इसके सियासी मायने?
यह बयान ऐसे समय आया है जब आकाश आनंद को बसपा से निष्कासित किया जा चुका है और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद तथा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से आकाश को लेकर बयानबाजी हो रही थी.
हालांकि, मायावती ने न तो दीपिका आनंद को पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित किया है और न ही 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए उनकी किसी औपचारिक भूमिका का ऐलान किया है. दीपिका कभी सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक भूमिका में नजर नहीं आई हैं, इसलिए उन्हें तुरंत एक सक्रिय राजनेता के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी. लेकिन मायावती द्वारा पहली बार स्पष्ट रूप से अपनी भतीजी का नाम राजनीतिक संदर्भ में लिए जाने से नई पीढ़ी के चेहरे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
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