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धौण ते गोड्डा रख 117 सीटां जित्तांगे’—AAP विधायक के बयान से सियासी घमासान, चंडीगढ़ प्रदर्शन का वीडियो वायरल, कांग्रेस का पलटवार

धौण ते गोड्डा रख 117 सीटां जित्तांगे’—AAP विधायक के बयान से सियासी घमासान, चंडीगढ़ प्रदर्शन का वीडियो वायरल, कांग्रेस का पलटवार

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। Aam Aadmi Party (आप) की एक महिला विधायक के बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। चंडीगढ़ में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक द्वारा दिए गए बयान— “धौण ते गोड्डा रख 117 सीटां जित्तांगे”—का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा ऐतराज जताया है। खासतौर पर Indian National Congress (कांग्रेस) ने इसे अहंकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।

चंडीगढ़ में हाल ही में आप द्वारा एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए। इसी दौरान मंच से बोलते हुए आप की एक महिला विधायक ने दावा किया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों में पंजाब की सभी 117 सीटों पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने पंजाबी भाषा में कहा— “धौण ते गोड्डा रख के 117 सीटां जित्तांगे।”

इस बयान का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। समर्थकों ने इसे आत्मविश्वास से भरा बयान बताया, जबकि विपक्ष ने इसे घमंड और लोकतंत्र का अपमान करार दिया।

वायरल वीडियो में विधायक का आक्रामक और जोशीला अंदाज साफ देखा जा सकता है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। आप समर्थक इसे पार्टी की मजबूती और जनाधार का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे सत्ता के नशे में दिया गया बयान कह रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल को और अधिक गरम कर सकते हैं। खासतौर पर तब, जब राज्य पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है।

इस बयान पर कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पंजाब किसी के दबाव में नहीं झुकता और यहां की जनता समय आने पर हर बात का जवाब देती है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “पंजाब दबता नहीं है। 2027 में जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।”

कांग्रेस का आरोप है कि आप नेताओं की भाषा और रवैया लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद आप नेताओं में अहंकार बढ़ गया है और वे जनता की समस्याओं से ध्यान भटका रहे हैं।

आप नेताओं ने विधायक के बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक बयान है, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विधायक का उद्देश्य किसी को धमकाना नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना था।

आप प्रवक्ताओं ने कहा कि पार्टी ने पिछले चुनाव में जनता का भरोसा जीता है और सरकार के कामकाज से लोग संतुष्ट हैं। उनका दावा है कि इसी भरोसे के दम पर पार्टी भविष्य में भी मजबूत प्रदर्शन करेगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीति में इस्तेमाल की जा रही भाषा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की आक्रामक भाषा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। वहीं, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनावी राजनीति में इस तरह के बयान असामान्य नहीं हैं, लेकिन इनके असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में नेताओं को शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश भी दे सकते हैं।

इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आप जहां खुद को पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनता के बीच मुद्दों को उठाने का मौका मान रही है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी से साफ है कि चुनावी माहौल अभी से बनने लगा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनता विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर वोट करेगी, न कि खोखले दावों पर। वहीं आप का दावा है कि उसकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाए हैं।

आम लोगों के बीच इस बयान को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे जोश और आत्मविश्वास का प्रतीक मानते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह सवाल उठाया है कि क्या इस तरह के बयान असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बताया है।

फिलहाल यह बयान और उसका वीडियो राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आप इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या पार्टी नेतृत्व इस बयान पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण देता है या नहीं।

एक बात साफ है कि पंजाब की राजनीति में 2027 की लड़ाई अभी से शब्दों और बयानों के जरिए शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में इस तरह के और भी तीखे राजनीतिक संदेश सुनने को मिल सकते हैं।

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