उत्तर प्रदेश
बकरीद पर ईंट का जवाब पत्थर से देंगे… कासमंडी किले पर हनुमान चालीसा की चेतावनी देने वाले सूरज पासी कौन?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलीहाबाद में स्थित कासमंडी किले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. इस स्थल पर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच दावों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है. पासी समाज का दावा है कि यह उनके पूर्वज महाराजा कंसा पासी का ऐतिहासिक महल है, जहां प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है. वहीं, दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद और मकबरे की जगह बता रहा है. इस पूरे विवाद के बीच ‘लाखन आर्मी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया है, जो इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं. आंदोलन की अगुवाई कर रहे सूरज पासी ने प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि वे लोग वहां बैठकर हनुमान चालीसा करेंगे. खबर में आगे जानिए कौन हैं सूरज पासी?
सूरज पासी ने क्या चेतावनी दी?
सूरज पासी ने शासन-प्रशासन को सचेत करते हुए कहा, “बकरा ईद पर कोई भी गलत एक्टिविटी हमारे किले और प्राचीन शिव मंदिर पर हुई तो बिल्कुल लाखन आर्मी बर्दाश्त नहीं करेगी और ईंट का जवाब पत्थर से देगी. हम लोग संविधान को मानने वाले लोग हैं, लेकिन अगर हमारी बातों को अनदेखा करके कोई भी ऐसी एक्टिविटी हुई तो उसकी जिम्मेदारी फिर प्रशासन की होगी. प्रशासन को पता है कि हम इतनी तादाद में आने का काम करेंगे कि मलीहाबाद प्रशासन संभाल नहीं पाएगा.” उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पर गंभीरता से ध्यान देने का निवेदन किया है ताकि सनातनी हिंदू पासी समाज की भावनाओं को आहत न पहुंचे.
कौन हैं सूरज पासी? साधारण परिवार से आंदोलन के चेहरे तक का सफर
खुद को नई पीढ़ी की सामाजिक चेतना का चेहरा बताने वाले सूरज पासी का जन्म लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र के भोलापुर गांव में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था. जब वह महज 17 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. इन संघर्षों के बीच उन्होंने पासी समाज के इतिहास को पढ़ना और समाज को संगठित करने की दिशा में काम करना शुरू किया. इतिहास की पड़ताल के दौरान उनका मानना था कि पासी समाज का अतीत बेहद गौरवशाली रहा है, लेकिन समय के साथ यह समाज सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे चला गया. इसी सोच के साथ उन्होंने युवाओं के भीतर पहचान, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना जगाने का अभियान शुरू किया.
क्या है ‘लाखन आर्मी’ और इसका नेटवर्क?
सूरज पासी ने 27 फरवरी 2023 को ‘लाखन एकता मिशन’ की शुरुआत की थी, जिसे बाद में ‘लाखन आर्मी’ के नाम से पहचान मिली. यह संगठन मुख्य रूप से युवाओं का एक सामाजिक मंच माना जाता है. इस संगठन की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली इस प्रकार हैं:
80 जिलों में फैला है नेटवर्क
वर्तमान में लाखन आर्मी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के करीब 80 जिलों तक फैल चुका है, जिनमें मुख्य रूप से हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, शाहजहांपुर, पीलीभीत और आजमगढ़ शामिल हैं. इसके अलावा यह संगठन बिहार और उत्तराखंड में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. शुरुआत में युवाओं तक सीमित रहने वाले इस संगठन को अब बुजुर्गों और समाज के सीनियर लोगों का भी समर्थन मिल रहा है.
यूपी की राजनीति में पासी समाज का क्या है सियासी समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पासी समाज को एक बहुत बड़ा चुनावी फैक्टर माना जाता है. दलित समाज में जाटव समुदाय के बाद पासी समाज को दूसरी सबसे बड़ी आबादी माना जाता है. अवध और पूर्वांचल के कई जिलों में पासी वोट बैंक इतना मजबूत है कि यह किसी भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है. यही वजह है कि मलीहाबाद का कासमंडी विवाद अब स्थानीय स्तर से निकलकर पासी समाज के भीतर उभर रही नई पीढ़ी की सामाजिक और राजनीतिक लामबंदी का एक बड़ा केंद्र बन गया है.
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