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बिहार विधान परिषद में भारी हंगामा, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर भिड़े सुनील सिंह–अशोक चौधरी, सदन की कार्यवाही बाधित
बिहार विधान परिषद में सोमवार से शुरू हुआ सियासी हंगामा मंगलवार को भी थमने का नाम नहीं लिया। राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख के कारण सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही। मंगलवार को स्थिति यह रही कि परिषद की कार्यवाही अपने निर्धारित समय से करीब 15 मिनट की देरी से शुरू हो सकी, लेकिन इसके बावजूद माहौल शांत नहीं हो पाया और सदन में शोर-शराबा जारी रहा।
मंगलवार को जैसे ही विधान परिषद की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हाथों में तख्तियां लेकर विपक्षी सदस्य सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराते नजर आए। उनका आरोप था कि राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है।
विपक्ष का कहना था कि बिहार में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगते हुए सदन में जोरदार प्रदर्शन किया
सदन में हंगामे का मुख्य कारण राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा का सवाल रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपराध रोकने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि आए दिन हत्या, लूट, छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ समय पर और सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।
विपक्ष का यह भी कहना था कि सरकार सिर्फ आंकड़ों के जरिए स्थिति को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है। विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री Nitish Kumar से सदन में जवाब देने की मांग की।
विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने भी कड़ा रुख अपनाया। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना था कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। उनका दावा था कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क है और अपराध पर नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
सत्ता पक्ष ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं और पुलिस-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार, विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इन मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
लगातार हो रहे हंगामे के बीच विधान परिषद के सभापति ने सदस्यों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन चर्चा और संवाद के लिए है, न कि शोर-शराबे के लिए। सभापति ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कार्यवाही इसी तरह बाधित होती रही, तो जरूरी विधायी कामकाज प्रभावित होगा।
हालांकि, सभापति की अपील के बावजूद विपक्ष अपने विरोध पर अड़ा रहा। नतीजतन, सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और कई अहम विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी।
विपक्षी नेताओं का आरोप था कि सरकार सदन में सीधे जवाब देने से बच रही है। उनका कहना था कि अगर सरकार के पास ठोस जवाब और समाधान हैं, तो उन्हें सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए। विपक्ष ने मांग की कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर विशेष चर्चा कराई जाए और सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
कुछ विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि सदन के अंदर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद में लगातार दूसरे दिन हुआ यह हंगामा राज्य की राजनीति में बढ़ते तनाव का संकेत है। जैसे-जैसे राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव भी तेज होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरता रहेगा, जबकि सरकार अपनी नीतियों और कार्यों का बचाव करती रहेगी।
विधान परिषद में हो रहे हंगामे को लेकर आम जनता के बीच भी चर्चा हो रही है। कुछ लोग विपक्ष के विरोध को जरूरी बता रहे हैं, क्योंकि इससे सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि सदन में बार-बार हंगामा होने से जनता से जुड़े असली मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस तेज है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सदन में इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है।
हंगामे के कारण विधान परिषद की कार्यवाही प्रभावित हुई और कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी। विधायी कार्य, प्रश्नकाल और अन्य प्रस्तावों पर पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। इससे सरकार और विपक्ष—दोनों की आलोचना भी हो रही है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि आने वाले दिनों में सदन का माहौल शांत होगा या नहीं। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि जब तक सरकार कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर संतोषजनक जवाब नहीं देती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन हंगामे के जरिए दबाव बनाने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिहार विधान परिषद में सोमवार से शुरू हुआ हंगामे का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा, जिससे साफ है कि राज्य की राजनीति इस समय काफी गरमाई हुई है। कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव ने सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया है। अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में क्या कोई बीच का रास्ता निकलता है, या फिर यह सियासी टकराव और तेज होता जाएगा।

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