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दिल्ली

मोदी का प्लेन असम में हाईवे पर उतर सकता है! पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी एयरस्ट्रिप तैयार, 14 फरवरी को पीएम करेंगे उद्घाटन

मोदी का प्लेन असम में हाईवे पर उतर सकता है! पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी एयरस्ट्रिप तैयार, 14 फरवरी को पीएम करेंगे उद्घाटन

देश के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। असम में एक ऐसा हाईवे तैयार किया गया है, जहां जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री का विमान या लड़ाकू जेट तक उतर सकते हैं। यह पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी एयरस्ट्रिप है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi 14 फरवरी को करेंगे। इस परियोजना को रणनीतिक, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन—तीनों दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

यह इमरजेंसी एयरस्ट्रिप असम के एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित की गई है। खास बात यह है कि सामान्य दिनों में यह सड़क आम यातायात के लिए इस्तेमाल होगी, लेकिन आपात स्थिति में कुछ ही समय में इसे रनवे में बदला जा सकेगा। इसका मतलब है कि संकट के समय यहां प्रधानमंत्री का विमान, वायुसेना के लड़ाकू जेट या बड़े सैन्य परिवहन विमान सुरक्षित लैंडिंग कर सकेंगे।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुविधा पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति को नई ताकत देगी। सीमावर्ती इलाकों में किसी भी आपात स्थिति—चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो या सुरक्षा चुनौती—में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से भौगोलिक चुनौतियों से जूझता रहा है। पहाड़ी इलाका, सीमित कनेक्टिविटी और मौसम की मार के कारण यहां आपात स्थितियों में त्वरित पहुंच बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में हाईवे पर बनी यह इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पूर्वोत्तर के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना न सिर्फ सैन्य जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आपदा प्रबंधन के दौरान राहत और बचाव कार्यों को भी तेज करेगी। बाढ़, भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के समय बड़े विमानों के जरिए राहत सामग्री और बचाव दल सीधे इलाके तक पहुंच सकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी को इस इमरजेंसी एयरस्ट्रिप का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर भारतीय वायुसेना द्वारा विशेष प्रदर्शन की भी संभावना जताई जा रही है, जिसमें लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ का अभ्यास दिखाया जा सकता है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, उद्घाटन के दौरान यह भी प्रदर्शित किया जाएगा कि कैसे कुछ ही मिनटों में एक सामान्य हाईवे को रनवे में तब्दील किया जा सकता है। इससे आम जनता को भी इस तकनीक और व्यवस्था की जानकारी मिलेगी।

इस एयरस्ट्रिप को विशेष तकनीक से तैयार किया गया है। सड़क की चौड़ाई, सतह की मजबूती, लाइटिंग सिस्टम और सुरक्षा इंतजाम—सब कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि भारी विमान भी यहां सुरक्षित उतर सकें।

  • रनवे की सतह को अतिरिक्त मजबूत बनाया गया है

  • रात में लैंडिंग के लिए विशेष लाइटिंग सिस्टम

  • आसपास के क्षेत्र को तुरंत खाली कराने की व्यवस्था

  • एयर ट्रैफिक और सड़क ट्रैफिक के बीच त्वरित समन्वय

इन सभी इंतजामों के चलते यह एयरस्ट्रिप देश की सबसे आधुनिक इमरजेंसी सुविधाओं में से एक मानी जा रही

रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि चीन और म्यांमार से सटे पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस तरह की इमरजेंसी एयरस्ट्रिप का होना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर यहां से सैन्य अभियानों को तेज किया जा सकता है और सीमावर्ती इलाकों में सेना की तैनाती को मजबूती मिल सकती है।

इसके अलावा, वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान भी यह एयरस्ट्रिप एक वैकल्पिक विकल्प के तौर पर काम करेगी। किसी तकनीकी खराबी या मौसम की समस्या के कारण अगर नजदीकी एयरपोर्ट उपलब्ध न हो, तो हाईवे पर बनी यह सुविधा बेहद कारगर साबित होगी।

इस परियोजना का लाभ केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों को भी इससे फायदा मिलेगा। हाईवे के बेहतर निर्माण से यातायात सुगम होगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

राज्य सरकार का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं असम और पूरे पूर्वोत्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगी।

इस अनोखी एयरस्ट्रिप को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लोग इसे देखने और समझने के लिए उत्सुक हैं कि कैसे एक आम सड़क अचानक रनवे में बदल जाती है। सोशल मीडिया पर भी इस परियोजना को लेकर चर्चाएं तेज हैं

केंद्र सरकार भविष्य में देश के अन्य रणनीतिक इलाकों में भी इस तरह की इमरजेंसी एयरस्ट्रिप विकसित करने पर विचार कर रही है। खासकर सीमावर्ती राज्यों और आपदा संभावित क्षेत्रों में ऐसी सुविधाएं सुरक्षा और राहत कार्यों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं।

असम में बनी पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी एयरस्ट्रिप केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास—तीनों का मजबूत उदाहरण है। 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन देश के लिए एक अहम संदेश होगा कि भारत अपनी सुरक्षा और कनेक्टिविटी को लेकर लगातार नए आयाम गढ़ रहा है।

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