बिहार-झारखंड
मुख्यमंत्री ने 25 लाख महिलाओं के खाते में सीधे ₹10,000 ट्रांसफर किए
मुख्यमंत्री ने 25 लाख महिलाओं के खाते में सीधे ₹10,000 ट्रांसफर किए
पटना | 16 फरवरी 2026

बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” के तहत लगभग 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ₹10,000 प्रति महिला की राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी। इस पहल के तहत कुल करीब ₹2500 करोड़ की राशि लाभार्थियों को हस्तांतरित की गई।
राजधानी पटना में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी 38 जिलों की महिलाओं से संवाद किया और प्रतीकात्मक रूप से राशि हस्तांतरित की। इस मौके पर बड़ी संख्या में जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने की पहल
सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह राशि उन महिलाओं को दी गई है जो छोटे व्यवसाय, घरेलू उद्योग, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ना चाहती हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “जब महिला सशक्त होती है तो पूरा परिवार और समाज सशक्त होता है। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और आत्मनिर्भर बने।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और जीविका दीदियों की भूमिका काफी अहम रही है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी अगुआ बन रही हैं।
डीबीटी से पारदर्शिता
सरकार ने राशि सीधे बैंक खातों में भेजकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक डीबीटी प्रणाली के कारण बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और लाभ सीधे पात्र महिलाओं तक पहुंचता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के माध्यम से सरकारी योजनाओं को ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों की सूची और भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
जिलों में उत्साह
राज्य के विभिन्न जिलों में इस योजना को लेकर उत्साह देखा गया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से कार्यक्रम देखा और मुख्यमंत्री के संबोधन को सुना। कुछ लाभार्थियों ने कहा कि यह राशि उनके छोटे व्यवसाय को शुरू करने या विस्तार देने में मददगार साबित होगी।
पटना जिले की एक लाभार्थी ने बताया कि वह इस राशि से सिलाई मशीन खरीदकर अपना काम शुरू करेंगी। वहीं, गया जिले की एक महिला ने कहा कि वह पशुपालन के लिए इस राशि का उपयोग करेंगी।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस राशि का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक असर दिखाई दे सकता है। छोटे स्तर पर शुरू होने वाले व्यवसाय धीरे-धीरे स्थानीय रोजगार भी पैदा कर सकते हैं।
हालांकि कुछ आर्थिक विश्लेषकों ने यह भी कहा कि योजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लाभार्थियों को प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय मार्गदर्शन भी मिले। केवल एकमुश्त राशि देने से अपेक्षित परिणाम तभी मिलेंगे जब उसे सही दिशा में उपयोग किया जाए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
जहां सत्तापक्ष ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, वहीं विपक्ष ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लाभार्थियों के चयन और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की निगरानी जरूरी है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजना पूरी तरह नियमों के अनुसार लागू की गई है।
आगे की योजना
सरकार के सूत्रों के अनुसार भविष्य में इस योजना के तहत और भी चरणों में सहायता राशि दी जा सकती है। साथ ही महिलाओं को प्रशिक्षण, मार्केट लिंक और बैंकिंग सहायता उपलब्ध कराने की भी योजना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों से फीडबैक लेकर योजना को और प्रभावी बनाया जाए।
निष्कर्ष
आज का दिन बिहार की लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद लेकर आया है। ₹10,000 की यह राशि भले छोटी लगे, लेकिन सही उपयोग से यह किसी परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की शुरुआत बन सकती है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि आने वाले महीनों में इस योजना का जमीनी असर कितना दिखाई देता है।

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