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मध्य प्रदेश

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद बदलेगी एमपी कांग्रेस की तस्वीर! छोटी होगी कार्यकारिणी; कई जिलाध्यक्ष भी बदलेंगे

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। कांग्रेस इस कार्यक्रम को केवल इंदौर या मालवा-निमाड़ तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि प्रदेशभर के युवाओं से जुड़ने के बड़े मंच के तौर पर देख रही है। इसी के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में व्यापक बदलाव की तैयारी है। पार्टी की नई टीम को मिशन-2028 यानी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर आकार दिया जाएगा।

कार्यकारिणी का छोटा होगा आकार

मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में 253 पदाधिकारी हैं। कांग्रेस अब इसे छोटा करते हुए करीब 125 पदाधिकारियों तक सीमित करने की तैयारी में है। संगठन में उन नेताओं की छुट्टी हो सकती है, जिनकी सक्रियता और संगठनात्मक योगदान अपेक्षित स्तर का नहीं रहा है। साथ ही विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पदाधिकारियों को भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा सकता है।

विधायकों से भी छीनी जा सकती है दोहरी जिम्मेदारी

संगठन में बदलाव केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। कुछ जिलाध्यक्षों को भी बदला जाएगा। इनमें वे पदाधिकारी शामिल हैं, जिनका प्रदर्शन पार्टी की कसौटी पर कमजोर रहा है।

इसके अलावा कुछ विधायकों के पास जिलाध्यक्ष के साथ संगठन की अन्य जिम्मेदारियां भी हैं। इनमें सिद्धार्थ कुशवाहा, ओमकार सिंह मरकाम और जयवर्धन सिंह समेत कुछ नाम शामिल हैं। पार्टी का आकलन है कि विधायक और जिलाध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी के कारण वे अपने संगठनात्मक क्षेत्र को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में उनके स्थान पर नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की जा सकती है।भाग और 34 प्रकोष्ठों में आएंगे नए चेहरे

प्रदेश कांग्रेस के सभी विभाग और प्रकोष्ठों की मौजूदा इकाइयां पहले ही भंग की जा चुकी हैं। अब इनके पुनर्गठन की तैयारी है। पार्टी के 19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों की प्रदेश इकाइयों में नए सिरे से नियुक्तियां होंगी।

अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, नई नियुक्ति होने तक उन्हें काम संभालते रहने के लिए कहा गया है।

कांग्रेस की कोशिश इस बार संगठन में नए और सक्रिय चेहरों को ज्यादा मौका देने की है। माना जा रहा है कि इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज होगी और नई टीम को सीधे मिशन-2028 की चुनावी रणनीति से जोड़ा जाएगा।

संगठनात्मक स्तर पर कई परिवर्तन प्रस्तावित हैं, लेकिन इन सब पर काम अब ‘छात्रों की गूंज’

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