Connect with us

दिल्ली

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के साइन क्यों नहीं? कांग्रेस ने बताई वजह

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के साइन क्यों नहीं? कांग्रेस ने बताई वजह

नई दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लोकसभा के मौजूदा सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की है। इस संबंध में विपक्ष की ओर से एक नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया है, जिस पर कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस नोटिस में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के हस्ताक्षर न होने को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर के रूप में ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और सरकार के पक्ष में झुकाव दिखाया। विपक्ष का कहना है कि उन्हें बार-बार बोलने से रोका गया, उनके नोटिस स्वीकार नहीं किए गए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचा गया। इसी नाराजगी के चलते विपक्ष ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने का फैसला किया।

इस नोटिस पर Indian National Congress, Dravida Munnetra Kazhagam, Samajwadi Party सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का दावा है कि यह कदम लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए उठाया गया है।

जैसे ही अविश्वास प्रस्ताव की जानकारी सामने आई, सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि कांग्रेस के प्रमुख चेहरे राहुल गांधी के हस्ताक्षर इस नोटिस में क्यों नहीं हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बात को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे कांग्रेस के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा, तो कुछ ने इसे रणनीतिक चूक बताया।

हालांकि, कांग्रेस ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कारण बताया है।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने साफ किया कि राहुल गांधी का अविश्वास प्रस्ताव पर साइन न करना किसी तरह का राजनीतिक संदेश या असहमति नहीं है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी फिलहाल लोकसभा में पार्टी के नेता नहीं हैं और संसदीय प्रक्रियाओं के तहत ऐसे प्रस्तावों पर आमतौर पर पार्टी के अधिकृत नेता या व्हिप के हस्ताक्षर होते हैं।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी ने सामूहिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और राहुल गांधी की सहमति पूरी तरह से इसमें शामिल है। उनके अनुसार, यह महज एक प्रक्रियागत मामला है, जिसे बेवजह तूल दिया जा रहा है।

विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रस्ताव किसी एक नेता या पार्टी से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे विपक्ष की साझा चिंता को दर्शाता है। विपक्ष का दावा है कि लोकसभा में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और स्पीकर की भूमिका को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया था।

डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने भी कांग्रेस के रुख का समर्थन किया है और कहा है कि राहुल गांधी के साइन न होने से प्रस्ताव की वैधता या विपक्ष की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ता।

सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के इस कदम को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि लोकसभा स्पीकर हमेशा संविधान और नियमों के तहत काम करते हैं और विपक्ष अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के प्रस्ताव ला रहा है।

सत्तारूढ़ नेताओं ने यह भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सिर्फ सुर्खियां बटोरना है, क्योंकि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है।

संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए न्यूनतम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। विपक्ष का दावा है कि उनके पास इससे कहीं अधिक सांसदों का समर्थन है। हालांकि, यह प्रस्ताव स्वीकार होगा या नहीं, यह पूरी तरह लोकसभा की प्रक्रिया और नियमों पर निर्भर करता है।

यदि नोटिस स्वीकार किया जाता है, तो इस पर चर्चा के लिए तारीख तय की जा सकती है। हालांकि, परंपरागत रूप से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बेहद दुर्लभ माने जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के कई राजनीतिक संकेत हैं। एक ओर विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि वह संसद के भीतर अपनी आवाज दबने नहीं देगा, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की हताशा के रूप में पेश कर रहा है।

राहुल गांधी के साइन न होने को लेकर उठे सवालों को भी विश्लेषक विपक्ष की रणनीति और कांग्रेस की आंतरिक कार्यशैली से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस मुद्दे पर एकजुट है।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग कांग्रेस की दलील को सही ठहरा रहे हैं, तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि अगर राहुल गांधी विपक्ष के प्रमुख चेहरा हैं, तो उनके साइन क्यों नहीं हैं। वहीं कई यूजर्स का मानना है कि असली मुद्दा स्पीकर की भूमिका और संसद की कार्यप्रणाली है, न कि किसी एक नेता के हस्ताक्षर।

अब सबकी निगाहें लोकसभा महासचिव के फैसले पर टिकी हैं कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार किया जाता है या नहीं। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो संसद में इस पर जोरदार बहस तय मानी जा रही है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और उस पर राहुल गांधी के साइन न होने का मुद्दा फिलहाल देश की राजनीति का बड़ा विषय बना हुआ है। कांग्रेस की सफाई के बाद यह साफ है कि यह कदम पार्टी की रणनीति और संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी तरह की अंदरूनी खींचतान का संकेत। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रस्ताव संसद की कार्यवाही को किस दिशा में ले जाता है और विपक्ष की इस पहल का क्या नतीजा निकलता है।

YashoRaj IT Solutions
Advertisement

Instagram

Facebook

yashoraj infosys, Best Web design company in patna 8

YashoRaj IT Solutions

Trending