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सूर्य का ‘आर्द्रा’ में प्रवेश: बिहार में झमाझम बारिश के आसार, घरों में महकेगी खीर-पूरी

भगवान सूर्य मृगशिरा नक्षत्र से सोमवार को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए। छह जुलाई तक सूर्य इसी नक्षत्र में रहेंगे। आर्द्रा नक्षत्र के शुरू होने के साथ सनातन धर्मावलंबी के घरों में विशेष रूप से खीर, दाल भरी पुरी बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है।

आरोग्यता पाने के लिए विशेष रूप से आम का सेवन किया जाता है। इस नक्षत्र में वर्षा की संभावना अधिक होती है। खेती-किसानी के लिए समय सही माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 27 नक्षत्रों में आर्द्रा को जीवनदायिनी नक्षत्र कहा गया है।

ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आर्द्रा नक्षत्र से लेकर हस्त नक्षत्र तक वर्षा के लिए अनुकूल समयावधि माना गया है।

पंचांगों के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रारंभ में अच्छी वर्षा के आसार है। कृषि कार्य की शुरूआत इसी नक्षत्र में होने के कारण यह नक्षत्र सर्वाधिक लोकप्रिय है।

हरि और हर की आराधना फलदायी:

आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देव भगवान शिव का रुद्र स्वरूप है। इस नक्षत्र में शिव, सूर्य, विष्णु और इन्द्रदेव की पूजा का विशेष विधान है।

इस दौरान ॐ नमः शिवाय, विष्णु सहस्त्रनाम, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, दान-पुण्य करना, गौ-ब्राह्मण, साधु की सेवा करना उत्तम फलदायी होता है। अपने आराध्य को खीर और आम का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

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