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हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत की तैयारी: औद्योगिक इमारतों की ऊंचाई सीमा हटाने का प्रस्ताव, निवेश और विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत की तैयारी: औद्योगिक इमारतों की ऊंचाई सीमा हटाने का प्रस्ताव, निवेश और विस्तार को मिलेगा बढ़ावा
गुरुग्राम।
हरियाणा सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 के तहत औद्योगिक इमारतों पर लागू 15 मीटर की ऊंचाई सीमा को हटाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंपा गया है।
सरकार का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो हरियाणा के उद्योगों को जमीन की कमी और बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी तथा वे क्षैतिज विस्तार के बजाय ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) विकास कर सकेंगे।
जमीन की ऊंची कीमतें बनीं औद्योगिक विकास में बाधा
उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए विस्तार करना कठिन हो गया है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों को ऊपर की ओर विस्तार की अनुमति देना समय की आवश्यकता बन गई है।
उन्होंने कहा,
“जमीन की ऊंची कीमतें औद्योगिक विकास के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। यदि उद्योगों को ऊर्ध्वाधर विकास की अनुमति दी जाती है तो वे बिना अतिरिक्त भूमि खरीदे अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकेंगे।”
2047 के आर्थिक लक्ष्य को ध्यान में रखकर प्रस्ताव
राव नरबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल वर्तमान जरूरतों को देखते हुए नहीं, बल्कि 2047 तक हरियाणा के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य को औद्योगिक और विनिर्माण हब के रूप में विकसित करने के लिए आधुनिक और लचीली नीतियों की जरूरत है।
उनका मानना है कि ऊंचाई सीमा हटाने से मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, रबर और गारमेंट सेक्टर जैसे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
30 फुट सड़क की अनिवार्यता हटाने का भी प्रस्ताव
सरकार ने औद्योगिक नीति 2026 के तहत एक और अहम बदलाव का प्रस्ताव किया है। इसके अनुसार औद्योगिक इमारतों के चारों ओर 30 फुट चौड़ी सड़क की अनिवार्य शर्त को हटाने की बात कही गई है।
इस बदलाव का उद्देश्य उद्योगों को कस्टमाइज्ड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अपनाने की स्वतंत्रता देना है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन पूरी तरह से उद्योग मालिकों की जिम्मेदारी होगी।
सरकार का कहना है कि यह कदम नए निवेश को आकर्षित करने और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को आसान बनाने के लिए उठाया जा रहा है।
राज्य के प्रमुख औद्योगिक बेल्ट्स को मिलेगा फायदा
इन प्रस्तावित बदलावों से हरियाणा के सबसे मूल्यवान औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, अंबाला, यमुनानगर, झज्जर, भिवानी, हिसार, करनाल और पंचकूला जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियाँ बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं।
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
गैर-नोटिफाइड क्षेत्रों में चल रहे उद्योगों को वैधता देने की पहल
जनवरी महीने में हरियाणा सरकार ने एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके तहत नोटिफाइड औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर संचालित हो रहे उद्योगों को नियमित (रेगुलराइज) करने की योजना बनाई गई है।
वर्षों से गैर-अनुरूप (नॉन-कन्फॉर्मिंग) क्षेत्रों में चल रहे उद्योगों को कानूनी अस्पष्टता, बैंकिंग सुविधाओं की कमी और विस्तार में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था। नई पहल का उद्देश्य इन समस्याओं का समाधान करना है।
क्लस्टर आधारित नियमितीकरण योजना
इस योजना के तहत ऐसे औद्योगिक क्लस्टर, जहाँ
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कम से कम 50 फैक्ट्रियाँ,
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न्यूनतम 10 एकड़ सटे हुए क्षेत्र में स्थित हों,
वे संयुक्त रूप से नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
वर्तमान में केवल वही फैक्ट्रियाँ कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त हैं, जो अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं। नई योजना से लाखों श्रमिकों और हजारों उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
लगभग 2 लाख फैक्ट्रियाँ औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में करीब 2 लाख फैक्ट्रियाँ और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ऐसी हैं, जो अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर संचालित हो रही हैं।
इनमें से बड़ी संख्या में इकाइयाँ गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, अंबाला, यमुनानगर, झज्जर, भिवानी, हिसार, करनाल और पंचकूला जिलों में स्थित हैं।
गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति
गुरुग्राम में फिलहाल IMT मानेसर, उद्योग विहार (फेज 1 से 5) और HSVP के औद्योगिक सेक्टर अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में फैक्ट्रियाँ कादीपुर, खांडसा, पटौदी और बेहरामपुर जैसे इलाकों में संचालित हो रही हैं।
इन क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल पार्ट्स, टेक्सटाइल, रबर और गारमेंट उद्योगों की मजबूत मौजूदगी है, लेकिन कानूनी मान्यता न होने के कारण उन्हें कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई सीमा हटाने और नियमितीकरण जैसी पहलें निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं। इससे हरियाणा की छवि एक उद्योग-हितैषी राज्य के रूप में और मजबूत होगी।
रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बल
सरकार का दावा है कि इन नीतिगत सुधारों से न केवल औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि राज्य में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर सकेगा।
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