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पंजाब

हेरोइन मामले में मोहाली कोर्ट ने 3 लोगों को किया बरी

मोहाली की एक विशेष अदालत ने डीएसपी गुरशेर सिंह संधू सहित अभियोजन पक्ष के 10 गवाहों के बयानों को विरोधाभासी पाए जाने और पुलिस अधिकारियों के एनडीपीएस अधिनियम के मामले में दर्ज करने की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहने के बाद 1.045 किलोग्राम हेरोइन रखने से जुड़े एनडीपीएस अधिनियम के एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है।

फेज-1 थाना अधिकारियों ने 4 जून, 2020 को फेज-7 औद्योगिक क्षेत्र में सिरसा निवासी सचिन कुमार और जसबीर कौर को 500-500 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया। उनसे पूछताछ के बाद खरड़ निवासी रघबीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके पास से एक दिन बाद 45 ग्राम मादक पदार्थ बरामद किया गया। हालांकि, तीनों ने दावा किया कि उन्हें पुलिस ने उनके घरों से उठाया था।

अदालत में, डीएसपी संधू ने कहा कि पुलिस पार्टी उस दिन दोपहर 1.30 बजे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र, फेज-7, मोहाली के पास एक स्वतंत्र गवाह खोजने में विफल रही थी।

बचाव पक्ष के वकील सीएस बावा ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 और 22 के तहत 4 जून, 2020 को फेज-1 पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था और 24 नवंबर, 2021 को आरोप तय किए गए थे।

जिरह के दौरान कार्यवाहक एसएचओ एसआई प्रीतपाल सिंह ने स्वीकार किया कि सैंपल सील उनके सामने पेश नहीं की गई थी।

अभियोजन पक्ष के गवाह डीएसपी गुरशेर सिंह ने कहा कि जांच अधिकारी ने कुछ लोगों को बुलाने का प्रयास किया था लेकिन कोई स्वतंत्र गवाह आने को तैयार नहीं था।

मामले के जांच अधिकारी एसआई जसपाल सिंह ने स्वीकार किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति को पास से किसी स्वतंत्र गवाह को बुलाने के लिए नहीं भेजा था। उन्होंने यह भी कहा कि वह कथित प्रतिबंधित पदार्थ का रंग बताने की स्थिति में नहीं थे, भले ही गुरशेर संधू ने प्रतिबंधित पदार्थ को क्रीम रंग के रूप में निर्दिष्ट किया था।

रिकवरी के गवाह हेड कांस्टेबल सरबजीत सिंह ने गवाही दी कि उन्होंने आरोपी व्यक्तियों को तलाशी लेने का कोई प्रस्ताव नहीं दिया था।

एएसआई गुरप्रताप सिंह ने बताया कि प्रतिबंधित पदार्थ का रंग भूरा/नारंगी प्रकार का था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कथित बरामदगी के स्थान के पास कोई दुकान या टिन शेड नहीं थे और जांच अधिकारी के निजी वाहन से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए बिजली प्राप्त की गई थी।

सीनियर एलसी राजबीर कौर ने अपनी जिरह में गवाही दी कि उन्हें बरामद सामग्री पर सील लगाने का सही समय याद नहीं है।

28 सितंबर को अपने आदेश में, अदालत ने निष्कर्ष निकाला: “अभियोजन की कहानी में संदेह इस अदालत को इस निष्कर्ष पर ले जाता है कि जांच एजेंसी पूरे सबूत को रिकॉर्ड पर साबित नहीं कर सकती है, जो संदेह की उचित छाया से परे आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए आवश्यक है, इसलिए, आरोपियों को इस मामले में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया जाता है।

अक्टूबर 2024 में, डीएसपी गुरशेर संधू को 3 और 4 सितंबर, 2022 की दरम्यानी रात को सीआईए स्टाफ, खरड़ में हिरासत में रहते हुए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कथित साक्षात्कार की सुविधा के लिए पंजाब पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन हाल ही में अदालत के आदेश पर बहाल कर दिया गया था।

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