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बिहार-झारखंड

मकर संक्रांति भोज से बिहार की राजनीति में हलचल, सत्ता-विपक्ष एक मंच पर

मकर संक्रांति के अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज ने बिहार की राजनीति में नई गर्माहट पैदा कर दी। इस आयोजन में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम कर दिया।

भोज में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस और साधु यादव समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए। खास बात यह रही कि लंबे समय बाद एक ही मंच पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं को साथ बैठे देखा गया।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और लालू प्रसाद यादव ने एक साथ बैठकर दही-चूड़ा और तिलकुट का स्वाद लिया। दोनों के बीच काफी देर तक अनौपचारिक बातचीत भी होती रही, जिसे राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।

भोज के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने बड़ा बयान देते हुए कहा,
“14 जनवरी आ गई है, सारे ग्रह अस्त-व्यस्त हैं, आज से राजनीति में नया समीकरण बनेगा।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।

काफी समय बाद तेज प्रताप यादव के निमंत्रण पर उनके मामा साधु यादव भी भोज में पहुंचे। इस मुलाकात को पारिवारिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

तेज प्रताप यादव खुद मेजबान की भूमिका में नजर आए और उन्होंने राज्यपाल सहित सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके आवास के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही, जो अपने नेताओं की एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखी।

दही-चूड़ा भोज के बहाने बिहार की राजनीति में यह संदेश साफ नजर आया कि मतभेद भले ही हों, लेकिन त्योहारों पर सियासी रिश्तों में मिठास बरकरार रहती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई मकर संक्रांति के साथ बिहार की राजनीति में कोई नया समीकरण जन्म लेने वाला है।

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