विदेश
ICE अधिकारी अब बिना जज के वारंट घरों में प्रवेश कर सकते हैं: अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव
वाशिंगटन:
अमेरिका में इमिग्रेशन और कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) के अधिकारियों को अब जज के द्वारा जारी किए गए वारंट के बिना लोगों के घरों में प्रवेश करने और गिरफ्तारी करने की अनुमति मिलने के हवाले से एक आंतरिक मेमो सामने आया है। यह कदम अमेरिकी कानून की दी गई परंपरागत गारंटी और नागरिकों के चौथे संशोधन (Fourth Amendment) के अधिकारों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
यह नीति बदलाव खासकर उन लोगों को लक्षित करता है जिनके खिलाफ डिपोर्टेशन (निर्यात) के अंतिम आदेश हैं। ICE अधिकारियों को अब प्रशासनिक (administrative) वारंट के आधार पर भी घर में प्रवेश करके गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है — जो पहले केवल न्यायिक (judicial) वारंट के साथ संभव था।
इस फैसले ने अमेरिका में आप्रवास नीति और नागरिक अधिकारों पर गंभीर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह नीति अमेरिकी संविधान के मूलभूत तत्त्वों के विपरीत है और इसके परिणामस्वरूप नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है।
📌 क्या है नया मेमो और क्या बदलाव किया गया?
ICE के वह आंतरिक दस्तावेज़ (मेमो) जो मीडिया और वकीलों को प्राप्त हुआ है, उसके अनुसार:
-
अब ICE अधिकारियों को जज के जारी किए वारंट के बिना घर में प्रवेश करने का अधिकार दिया गया है।
-
इसके लिए प्रशासनिक वारंट (Administrative Warrants), जिसमें जज का हस्ताक्षर नहीं होता, पर्याप्त माना गया है।
-
इस वारंट के आधार पर अधिकारी घर में जबरन प्रवेश कर सकते हैं और यहां तक कि घर के दरवाज़ा तोड़कर भी गिरफ्तारी कर सकते हैं यदि निवासी अनुमति नहीं देता।
इस बदलाव का औपचारिक नाम I-205 ऐडमिनिस्ट्रेटिव वारंट डाइरेक्टिव बताया जा रहा है, जिसे पिछले वर्ष मई 2025 में ICE के कार्यवाहक निदेशक द्वारा अनुमोदित किया गया था।
⚖️ संविधान और चौथा संशोधन (Fourth Amendment)
संयुक्त राज्य अमेरिका के चौथे संशोधन के तहत हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसके घर, कागज़ों और व्यक्तिगत चीज़ों को बिना उचित कारण और न्यायिक वारंट के बिना संदिग्धता/जाँच से सुरक्षित रखा जाए। यह संशोधन विशेष रूप से घर में बिना अनुमति प्रवेश और तलाशी से रोकता है।
पिछले दशकों में कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने स्पष्ट किया है कि गृह प्रवेश और तलाशी के लिए न्यायिक वारंट आवश्यक है — बशर्ते कोई आपातकालीन परिस्थिति (exigent circumstances) न हो।
अब ICE की इस नई नीति में कहा गया है कि प्रशासनिक वारंट ही गृह प्रवेश और गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त है, भले ही जज ने उसे मंज़ूर नहीं किया हो। इस तर्क को DHS (Department of Homeland Security) ने यह कहते हुए समर्थन दिया है कि इसमें “न्यायिक प्रक्रिया में पर्याप्त due process” शामिल है। हालांकि आलोचक इसका विरोध जोर से कर रहे हैं।
👨⚖️ वकीलों और अधिकार कार्यकर्ताओं का विरोध
इस नई नीति को लेकर नागरिक अधिकार समूह, वकील और इमिग्रेंट अधिकार संगठन तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम संविधान के मौलिक सुरक्षा तत्त्वों को कमजोर करता है और व्यक्ति की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नियमों को दरकिनार करता है।
शिकागो के एक इमिग्रेंट अधिकार वकील ने कहा कि यह नीति “न्याय और संवैधानिक संरक्षणों के मूल सिद्धांतों” के बिल्कुल विपरीत है। विशेषज्ञों का तर्क है कि कोर्ट वारंट का होना सुनिश्चित करता है कि गृह प्रवेश को न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़े, जबकि प्रशासनिक वारंट सूत्रधार अधिकारियों को अत्यधिक शक्ति दे सकता है।
🏠 गृह प्रवेश के विवादित उदाहरण
हाल के दिनों में विवादित घटनाएँ भी सामने आई हैं, जहाँ ICE अधिकारियों ने बिना न्यायिक वारंट के घरों में प्रवेश किया:
-
मिनियापोलिस में एक घर का दरवाज़ा जबरदस्ती तोड़ा गया और वहां से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था, जिसमें वकीलों ने चौथे संशोधन का उल्लंघन बताया।
-
इस घटना में एक नागरिक को सिर्फ अंडरगियर में घर से बाहर निकाला गया, जिसे लेकर न्याय के अधिकार समूह ने कड़ी आलोचना की।
इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ICE अधिकारियों को वास्तव में ऐसे प्रसंगों में घर में प्रवेश का पूरा अधिकार मिल जाना चाहिए?
📉 आलोचना का केंद्र: अधिकारों का कमजोर होना
आलोचक कहते हैं:
-
गृह प्रवेश के लिए प्रशासनिक वारंट का इस्तेमाल संविधान की मूल सुरक्षा बाधाओं के खिलाफ है।
-
इससे पुलिस और इमिग्रेशन एजेंसियों के पास अति शक्ति केंद्रित हो सकती है।
-
आदिवासी, रंगीन समुदाय और आप्रवासी परिवारों में भय और अविश्वास की भावना बढ़ रही है।
कई मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीति से नागरिकों का मूल अधिकार — अपने घर को सुरक्षित स्थान मानने का अधिकार — खतरे में पड़ सकता है।
⚖️ कानूनी लड़ाई की आशंका
अब संभावित रूप से कई मुक़दमे इस नीति को चुनौती दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक नियंत्रण के बीच संघर्ष बन सकता है, और संभव है सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाए।
Americans Civil Liberties Union (ACLU) और अन्य मानवाधिकार समूह पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे इस नमो के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करेंगे और इसे संविधान के Fourth Amendment का उल्लंघन बताएँगे।
🌎 वैश्विक परिप्रेक्ष्य
यद्यपि यह नीति अमेरिका में लागू हो रही है, दुनियाभर के देश भी अपनी सीमाओं और गृह सुरक्षा नीतियों को मजबूत करने के लिए कदम उठा रहे हैं। लेकिन अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में नागरिक अधिकार और न्यायिक समीक्षा पर कहीं अधिक ध्यान दिया जाता है।
इस नई नीति पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है कि इससे गृह सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता का संतुलन बिगड़ सकता है।
📝 निष्कर्ष
अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) की ओर से बिना जज के वारंट के घरों में प्रवेश करने की अनुमति देने वाला यह नया निर्णय अमेरिकी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का एक बेहद संवेदनशील मामला है। इस नीति ने न्यायिक प्रक्रिया, नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच जारी संतुलन को चुनौती दी है और संभावित कानूनी लड़ाइयों को जन्म दिया है।
इस पर विस्तृत और विश्लेषणात्मक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए 👉 www.jantavoicetimes.com, जहां आप अमेरिका इमिग्रेशन, नागरिक अधिकार, वैश्विक नीति और कानून से जुड़ी ताज़ा खबरें पा सकते हैं।

-
देश2 months ago‘न्याय के साथ विकास’ से ‘Ease of Living’ तक: बिहार को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
-
दिल्ली1 month agoपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अमित शाह से करेंगे मुलाकात, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
-
पंजाब1 month agoमीडिया पर दबाव के आरोप, पंजाब की राजनीति में बढ़ा विवाद
-
विदेश1 month agoफर्जी डिग्री रैकेट पर ऑस्ट्रेलिया में हंगामा, भारतीय कार्रवाई का हवाला देकर सीनेटर मैल्कम रॉबर्ट्स ने छात्र वीज़ा सिस्टम पर उठाए सवाल
-
उत्तर प्रदेश2 months agoपूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जेल में बिगड़ी तबीयत, देवरिया से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
-
देश1 month ago2027 चुनाव से पहले पंजाब सीएम भगवंत मान का बड़ा राजनीतिक दांव
-
देश1 month agoराष्ट्रपति द्रौपादी मुर्मु का अमृतसर साहिब में भव्य स्वागत, CM भगवंत मान ने सिख मर्यादा व संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
-
बिहार-झारखंड2 months agoखाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री



