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पंजाब

कई महीनों के आंदोलन के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री ने बिजली इंजीनियरों से की मुलाकात

कई महीनों के आंदोलन के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री ने बिजली इंजीनियरों से की मुलाकात

पंजाब के बिजली क्षेत्र में पिछले कई महीनों से जारी असंतोष के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann से पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंजीनियर्स एसोसिएशन (PSEBEA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसोसिएशन के अध्यक्ष जे.एस. धीमान ने किया। बैठक में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के इंजीनियरों और कर्मचारियों से जुड़ी विभिन्न लंबित मांगों और grievances पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, यह 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बनने के बाद पहली बार है जब मुख्यमंत्री और PSEBEA के बीच कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर औपचारिक बैठक हुई है। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि PSPCL के इंजीनियर और कर्मचारी नवंबर 2025 से आंदोलन के रास्ते पर हैं।

निलंबन और बर्खास्तगी बना असंतोष की बड़ी वजह

बैठक के दौरान हरिश शर्मा, जो रोपड़ और गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट के चीफ इंजीनियर हैं, के निलंबन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही हरजीत सिंह, निदेशक (जनरेशन), की सेवाएं समाप्त किए जाने का मामला भी चर्चा का केंद्र रहा।

इंजीनियरों का कहना है कि इन्हीं दोनों मामलों ने पूरे बिजली विभाग में व्यापक नाराजगी को जन्म दिया। दरअसल, यह अनुशासनात्मक कार्रवाई राज्य द्वारा संचालित थर्मल पावर प्लांटों में निजी थर्मल प्लांटों की तुलना में ईंधन लागत अधिक होने के आरोपों के बाद की गई थी।

इंजीनियरों ने कार्रवाई को बताया मनमाना

PSEBEA से जुड़े इंजीनियरों का लगातार यह दावा रहा है कि की गई कार्रवाई मनमानी थी और इसमें सिस्टम और नीतिगत स्तर की खामियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उनका कहना है कि केवल अधिकारियों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक कि व्यापक नीतिगत सुधार नहीं किए जाते।

आंदोलन के दौरान उभरे अन्य अहम मुद्दे

आंदोलन के दौरान कई अन्य मुद्दे भी सामने आए, जिन पर बैठक में चर्चा की गई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

ऑप्टिमम यूटिलाइजेशन ऑफ वेकेंट गवर्नमेंट-ओन्ड लैंड (OUVGL) योजना, जिसके तहत PSPCL की 50 से अधिक संपत्तियों को चिह्नित किया गया है

विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 के मसौदे पर राज्य सरकार की स्पष्ट स्थिति का अभाव

PSEBEA का कहना है कि कर्मचारी इस संशोधन विधेयक को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे सार्वजनिक बिजली क्षेत्र कमजोर हो सकता है।

संयुक्त आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में PSEBEA ने PSPCL के अन्य यूनियनों के साथ मिलकर जॉइंट एक्शन कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में बिजली क्षेत्र के कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनर्स शामिल हैं।

यह संयुक्त मोर्चा पिछले कुछ महीनों से राज्यभर में ज़ोन-स्तरीय विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित कर रहा है, ताकि सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित किया जा सके।

संवाद से समाधान की उम्मीद

मुख्यमंत्री और इंजीनियरों के बीच हुई इस बैठक को दोनों पक्षों के बीच संवाद की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। बिजली क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बातचीत के बाद उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का कोई ठोस समाधान निकलेगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब पंजाब के बिजली क्षेत्र में स्थिरता और भरोसे की बहाली को बेहद जरूरी माना जा रहा है।

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