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पंजाब

अनाथ और दृष्टिबाधित छात्रों को बड़ी राहत: पंजाब सरकार ने आईटीआई में COPA कोर्स की फीस माफ करने को दी मंजूरी

अनाथ और दृष्टिबाधित छात्रों को बड़ी राहत: पंजाब सरकार ने आईटीआई में COPA कोर्स की फीस माफ करने को दी मंजूरी

चंडीगढ़।
पंजाब सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाते हुए अनाथ और दृष्टिबाधित छात्रों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में संचालित कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA-VI) ट्रेड में पढ़ने वाले अनाथालयों और नेत्रहीन विद्यालयों से आने वाले छात्रों के लिए 100 प्रतिशत प्रशिक्षण शुल्क माफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इस निर्णय की पुष्टि करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आर्थिक मजबूरी किसी भी छात्र की प्रतिभा और भविष्य के आड़े न आए

कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार का मानना है कि शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण केवल सुविधासंपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस फैसले के तहत अब अनाथालयों और नेत्रहीन विद्यालयों से आने वाले छात्र COPA-VI ट्रेड में बिना किसी शुल्क के प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे

उन्होंने कहा कि यह सुविधा फिलहाल राज्य के नौ सरकारी आईटीआई संस्थानों में लागू की जाएगी, जहाँ यह ट्रेड संचालित किया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों को लाभ मिलेगा, जो आर्थिक कारणों से तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते थे।

बजट बैठकों में हुआ विस्तृत मंथन

वित्त मंत्री ने बताया कि इस प्रस्ताव पर 29 जनवरी को हुई बजट बैठकों के दौरान विस्तार से चर्चा की गई थी। संबंधित प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की गहन समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी शिक्षा समाज के हर वर्ग तक पहुँचे

हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस फैसले से सरकारी राजस्व पर कुछ भार पड़ेगा, लेकिन सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि मानव संसाधन में निवेश के रूप में देख रही है।

उन्होंने कहा,

“यह निर्णय सरकार पर एक वित्तीय दायित्व जरूर डालता है, लेकिन हम इसे बोझ नहीं मानते। यह पंजाब के भविष्य में किया गया निवेश है, जो आने वाले वर्षों में राज्य को कुशल मानव संसाधन प्रदान करेगा।”

डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार का लक्ष्य राज्य को कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता का अग्रणी केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि आईटी और डिजिटल सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में COPA जैसे तकनीकी कोर्स युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलते हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दृष्टिबाधित और अनाथ युवाओं के लिए यह कदम उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

सम्मानजनक आजीविका की ओर एक मजबूत कदम

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि इन युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर ये छात्र आईटी सेक्टर में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने कहा,

“हम अपने विशेष रूप से सक्षम और अनाथ युवाओं को एक समान मंच देना चाहते हैं, ताकि वे तकनीकी दक्षता हासिल कर सकें और तेजी से बढ़ते आईटी सेक्टर में अपनी पहचान बना सकें।”

सामाजिक समावेशन की नीति को मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब सरकार का यह निर्णय सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार केवल आर्थिक विकास पर ही नहीं, बल्कि समान अवसर और सामाजिक न्याय पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।

यह निर्णय उन परिवारों और संस्थानों के लिए भी राहत लेकर आया है, जो सीमित संसाधनों में बच्चों की देखभाल और शिक्षा का जिम्मा उठाते हैं।

शिक्षा नीति के अनुरूप निर्णय

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की भावना के भी अनुरूप है, जिसमें समावेशी शिक्षा और कौशल आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। COPA-VI जैसे कोर्स छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करते हैं।

भविष्य में और विस्तार की संभावना

सूत्रों के अनुसार, यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में सरकार अन्य तकनीकी ट्रेड्स में भी इसी तरह की फीस माफी योजनाएँ लागू कर सकती है। इससे और अधिक वंचित वर्गों के छात्रों को लाभ मिलने की संभावना है।

सरकार की मंशा साफ

पंजाब सरकार के इस फैसले को शिक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक प्रगतिशील और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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