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पंजाब

“माता-पिता का साथ, बच्चों का विकास” थीम पर राज्यव्यापी पेरेंट वर्कशॉप का आयोजन

पंजाब में शिक्षा क्रांति का नया अध्याय:

“माता-पिता का साथ, बच्चों का विकास” थीम पर राज्यव्यापी पेरेंट वर्कशॉप का आयोजन

पंजाब सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आज पूरे राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में “माता-पिता का साथ, बच्चों का विकास” थीम पर विशेष राज्यव्यापी पेरेंट वर्कशॉप का आयोजन किया। यह पहल न केवल शैक्षणिक सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास—जिसमें भावनात्मक, सामाजिक और मानसिक विकास शामिल है—को केंद्र में रखने वाली एक दूरदर्शी सोच को भी दर्शाती है।

यह कार्यक्रम इस विश्वास पर आधारित है कि बच्चों की शिक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता और शिक्षकों की साझा भागीदारी से ही सशक्त बनती है। इसी सोच को ज़मीनी स्तर तक ले जाने के लिए पंजाब सरकार ने एक साथ पूरे राज्य में यह अभिनव प्रयोग शुरू किया।


शिक्षा में साझेदारी की नई सोच

अब तक शिक्षा व्यवस्था में माता-पिता की भूमिका अक्सर सीमित रही है—रिपोर्ट कार्ड देखना, मीटिंग में आना या शिकायत करना। लेकिन इस पेरेंट वर्कशॉप के माध्यम से सरकार ने इस धारणा को बदलने का प्रयास किया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य है:

  • माता-पिता को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ना

  • घर और स्कूल के बीच मजबूत संवाद स्थापित करना

  • बच्चों के व्यवहार, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन पर ध्यान देना

विशेषज्ञों का मानना है कि जब माता-पिता बच्चों की शिक्षा में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं, तो बच्चों का प्रदर्शन, अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।


वर्कशॉप में क्या-क्या रहा खास

राज्यभर के सरकारी स्कूलों में आयोजित इस वर्कशॉप में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जैसे:

  • बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद कैसे करें

  • मोबाइल और स्क्रीन टाइम का संतुलित उपयोग

  • पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल (Life Skills) का विकास

  • बच्चों में आत्मसम्मान और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना

  • परीक्षा के दबाव से बच्चों को कैसे उबारें

शिक्षकों और प्रशिक्षित काउंसलर्स ने माता-पिता को सरल भाषा में समझाया कि डांट या दबाव नहीं, बल्कि सहयोग और समझ बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करती है


सरकार का विज़न: सिर्फ पढ़ाई नहीं, पूरा विकास

पंजाब सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि राज्य अब केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित शिक्षा नहीं चाहता। सरकार का फोकस अब होलिस्टिक एजुकेशन मॉडल पर है, जिसमें बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किताबों की पढ़ाई।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वर्कशॉप आने वाले समय में:

  • ड्रॉपआउट रेट कम करने

  • बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने

  • स्कूलों के प्रति माता-पिता का भरोसा मजबूत करने
    में अहम भूमिका निभाएगी।

इस तरह की शिक्षा संबंधी सकारात्मक पहलों की विस्तृत कवरेज आप www.jantavoicetimes.com पर लगातार पढ़ सकते हैं।


माता-पिता की भागीदारी: बदली सोच, बदला माहौल

कई अभिभावकों ने वर्कशॉप के बाद माना कि उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ कि बच्चों की छोटी-छोटी आदतें, व्यवहार और भावनाएं भी उनकी पढ़ाई को प्रभावित करती हैं।

एक अभिभावक ने कहा,

“हम हमेशा नंबरों पर ध्यान देते थे, लेकिन आज समझ आया कि बच्चे का मन मजबूत होगा तभी वह पढ़ाई में भी अच्छा करेगा।”

इस तरह की प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण हैं कि यह पहल केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की शुरुआत है।


शिक्षकों के लिए भी सीख का अवसर

यह वर्कशॉप केवल माता-पिता के लिए नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक नया अनुभव रही। शिक्षकों को यह समझने का मौका मिला कि घर का माहौल बच्चों की कक्षा में मौजूदगी और प्रदर्शन को किस तरह प्रभावित करता है।

जब शिक्षक और अभिभावक एक ही लक्ष्य पर काम करते हैं, तो बच्चे को दोहरी ताकत मिलती है—घर का सहारा और स्कूल का मार्गदर्शन।


भविष्य की दिशा और संभावनाएं

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पेरेंट वर्कशॉप को नियमित रूप से आयोजित किया जाए, तो पंजाब आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर एक शिक्षा मॉडल बन सकता है।

यह पहल:

  • नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों से मेल खाती है

  • बच्चों को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करती है

  • समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है


निष्कर्ष: शिक्षा की असली ताकत – सहयोग

“माता-पिता का साथ, बच्चों का विकास” सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि एक दर्शन है। पंजाब सरकार की यह राज्यव्यापी पेरेंट वर्कशॉप इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, स्कूल और परिवार एक साथ आते हैं, तो शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहती—वह जीवन निर्माण का माध्यम बन जाती है।

यह पहल आने वाले समय में न केवल बच्चों का भविष्य संवारने में मदद करेगी, बल्कि पूरे समाज को एक अधिक संवेदनशील, जागरूक और सशक्त दिशा में ले जाएगी।

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