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बिहार-झारखंड

बिहार में ग्रामीण उच्च शिक्षा को बड़ी मजबूती: 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे, बक्सर के चार ब्लॉक भी शामिल

बिहार में ग्रामीण उच्च शिक्षा को बड़ी मजबूती: 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे, बक्सर के चार ब्लॉक भी शामिल

बिहार में ग्रामीण उच्च शिक्षा को बड़ी मजबूती: 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे, बक्सर के चार ब्लॉक भी शामिल

बक्सर/पटना। ग्रामीण बिहार में उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 213 चयनित प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की स्वीकृति दे दी है, ताकि स्नातक स्तर की पढ़ाई छात्रों को उनके घर के नज़दीक उपलब्ध हो सके।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बक्सर जिले के ब्रह्मपुर, केसठ, चक्की और चौगाईं प्रखंडों को भी शामिल किया गया है। इन इलाकों के छात्रों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यहां के विद्यार्थियों को स्नातक पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या पड़ोसी जिलों की ओर रुख करना पड़ता था।


दूर-दराज़ कॉलेजों के कारण बढ़ रही थी ड्रॉपआउट दर

फिलहाल इन चारों प्रखंडों के छात्रों को 40 से 50 किलोमीटर तक की दूरी तय कर कॉलेज जाना पड़ता है। इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा था। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और छात्राओं के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण रही है।

चक्की प्रखंड के इंटरमीडिएट छात्र रवि कुमार यादव कहते हैं,

“अगर हमारे प्रखंड में ही डिग्री कॉलेज खुल जाए, तो रोज़ाना इतनी लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। मेरे कई दोस्तों ने सिर्फ इस वजह से पढ़ाई छोड़ दी, क्योंकि परिवार हॉस्टल या सफर का खर्च नहीं उठा सकता था।”


छात्राओं के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

ग्रामीण इलाकों में डिग्री कॉलेजों की कमी का सबसे ज्यादा असर लड़कियों की शिक्षा पर पड़ा है। कई छात्राएं इंटरमीडिएट के बाद पढ़ाई इसलिए छोड़ देती हैं, क्योंकि माता-पिता उन्हें दूर भेजने में असहज महसूस करते हैं।

केसठ की छात्रा सुमन कुमारी बताती हैं,

“मेरे माता-पिता नहीं चाहते थे कि मैं जिला मुख्यालय जाकर पढ़ाई करूं। अगर हमारे इलाके में ही कॉलेज खुलता है, तो मैं सुरक्षित माहौल में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकूंगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर पाऊंगी।”


मुख्यमंत्री की सोच: शिक्षा का विकेंद्रीकरण

यह पहल नीतीश कुमार की उस सोच के अनुरूप है, जिसमें शिक्षा को शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांवों और प्रखंड स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

शिक्षा विभाग ने चयनित प्रखंडों में उपयुक्त भूमि की पहचान और आधारभूत ढांचे की योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य यह है कि ग्रामीण बिहार में भी उच्च शिक्षा का मजबूत इकोसिस्टम विकसित हो और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी भी छात्र को पीछे न रहना पड़े।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार चाहती है कि

  • छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले

  • ड्रॉपआउट दर में कमी आए

  • लड़कियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़े


“यह शिक्षा का असली विकेंद्रीकरण है”

ब्रह्मपुर के वरिष्ठ शिक्षक अनिल कुमार का मानना है कि यह फैसला ग्रामीण प्रतिभाओं को सामने लाने में निर्णायक साबित होगा।
उन्होंने कहा,

“जब कॉलेज गांवों तक पहुंचेंगे, तब वह प्रतिभा सामने आएगी जो अब तक गरीबी और दूरी की वजह से दबकर रह जाती थी। यह शिक्षा का असली विकेंद्रीकरण है।”


रोजगार और विकास को भी मिलेगा बढ़ावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए डिग्री कॉलेज केवल शिक्षा तक सीमित लाभ नहीं देंगे, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक विकास भी होगा।

कॉलेज खुलने से:

  • शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

  • स्थानीय बाजार और परिवहन को गति मिलेगी

  • छात्रों का बड़े शहरों की ओर पलायन कम होगा

चौगाईं के स्थानीय अभिभावक और जदयू के वरिष्ठ नेता सीताराम सिंह कहते हैं,

“गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह किसी सपने के पूरा होने जैसा है। अब हमारे बच्चे बिना घर छोड़े पढ़ाई कर सकेंगे।”


ग्रामीण बिहार के लिए दूरगामी असर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना ज़मीनी स्तर पर सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण बिहार में:

  • उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ेगा

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में ग्रामीण छात्रों की भागीदारी मजबूत होगी

  • सामाजिक असमानता में कमी आएगी

यह कदम न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाएगा, बल्कि बिहार के मानव संसाधन विकास को भी नई दिशा देगा।


निष्कर्ष

213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने का फैसला बिहार सरकार की दूरदर्शी शिक्षा नीति को दर्शाता है। बक्सर जिले के ब्रह्मपुर, केसठ, चक्की और चौगाईं जैसे इलाकों के लिए यह निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां वर्षों से उच्च शिक्षा की कमी महसूस की जा रही थी।

यह पहल न केवल छात्रों की पढ़ाई आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण बिहार को शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

बिहार से जुड़ी ऐसी ही विश्वसनीय, ज़मीनी और जनहित की खबरें आप www.jantavoicetimes.com पर पढ़ सकते हैं।

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