मध्य प्रदेश
ˇमध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चौथे दिन में प्रवेश, 2026-27 की आबकारी नीति पर होगा अहम बयान
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चौथे दिन में प्रवेश, 2026-27 की आबकारी नीति पर होगा अहम बयान
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सदन में आज का दिन खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति पर विस्तृत वक्तव्य देने वाले हैं। इसके साथ ही राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा भी जारी रहेगी, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति के तहत सरकार की नीतियों और कार्यों पर विचार रखेंगे।

इससे पहले राज्य सरकार ने 4.38 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पेश कर प्रदेश की विकास योजनाओं का खाका सामने रखा था। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट बताया जा रहा है, जिसमें किसानों, महिलाओं और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
आबकारी नीति पर सबकी नजर
आज सदन में पेश की जाने वाली आबकारी नीति को लेकर व्यापक चर्चा की संभावना है। यह नीति राज्य के राजस्व संग्रह का एक बड़ा स्रोत मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसी नीति तैयार करना है जिससे राजस्व में वृद्धि हो, अवैध शराब पर अंकुश लगे और सामाजिक संतुलन भी बना रहे।
सूत्रों के अनुसार नई नीति में लाइसेंस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने, डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध बिक्री रोकने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। सरकार यह भी संकेत दे चुकी है कि आबकारी राजस्व का एक हिस्सा सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य योजनाओं में लगाया जाएगा।
विपक्ष की ओर से इस नीति पर सवाल उठाए जाने की संभावना है। विपक्ष का तर्क है कि शराब नीति में बदलाव केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सामाजिक प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे में सदन में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा
बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा भी जारी है। इस अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों, आगामी योजनाओं और विकास के एजेंडे का उल्लेख किया गया था। सत्तापक्ष इसे सरकार की प्रतिबद्धता और उपलब्धियों का दस्तावेज बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे जमीनी हकीकत से दूर बताकर सवाल खड़े कर रहा है।
सदन में कई विधायक अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांग सकते हैं। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
₹4.38 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बजट
इस सत्र से पहले प्रस्तुत किया गया 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट बताया जा रहा है। सरकार ने इसे विकासोन्मुख और समावेशी बजट करार दिया है।
किसानों के लिए विशेष प्रावधान
बजट में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार, समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था को सुदृढ़ करना और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना प्रमुख बिंदु हैं।
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने की बात कही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस
महिला कल्याण योजनाओं के लिए बजट में उल्लेखनीय राशि का प्रावधान किया गया है। महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन, पोषण योजनाओं का विस्तार और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की घोषणा की गई है।
सरकार का दावा है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने से प्रदेश की समग्र प्रगति सुनिश्चित होगी।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास
बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों, पुलों, शहरी परिवहन, जल आपूर्ति और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्तावित है।
सरकार का कहना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और नए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी बजट में शामिल है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने बजट को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि बजट में आंकड़े बड़े जरूर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन ही असली परीक्षा होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्षों की कई योजनाएं अभी अधूरी हैं, ऐसे में नई घोषणाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
हालांकि सत्तापक्ष का दावा है कि राज्य सरकार विकास की रफ्तार को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है और बजट में घोषित योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी।
आगे की राह
बजट सत्र के आने वाले दिनों में विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। विधायक अपने सुझाव और संशोधन प्रस्तुत करेंगे। यह सत्र प्रदेश की आगामी नीतियों और विकास दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का बजट सत्र आगामी चुनावी रणनीतियों की झलक भी दे सकता है। सरकार विकास और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जनता का भरोसा मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों की समीक्षा कर जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र इस समय राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम चरण में है। एक ओर जहां 2026-27 की आबकारी नीति पर सरकार का रुख स्पष्ट होगा, वहीं दूसरी ओर राज्यपाल के अभिभाषण पर जारी चर्चा से सरकार की प्राथमिकताओं और विपक्ष की रणनीति का पता चलेगा।
4.38 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड बजट के साथ प्रदेश ने विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि घोषित योजनाएं किस गति और प्रभावशीलता के साथ जमीन पर उतरती हैं। आने वाले दिनों में सदन की बहसें प्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती हैं।

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