Connect with us

आस्था

पौष पूर्णिमा से 2026 के धार्मिक पर्वों की शुरुआत, गंगा घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़

पौष पूर्णिमा से 2026 के धार्मिक पर्वों की शुरुआत, गंगा घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़

पटना। नववर्ष 2026 की शुरुआत सनातन धर्मावलंबियों के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास मानी जा रही है। जनवरी माह में एक के बाद एक बड़े धार्मिक पर्व, व्रत और शुभ तिथियां पड़ रही हैं, जिसके चलते गंगा घाटों से लेकर विभिन्न तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस धार्मिक क्रम की शुरुआत पौष पूर्णिमा से हो चुकी है, जिसे स्नान, दान और पुण्य अर्जन का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।

सूर्य उपासना और मोक्ष की कामना

पौष मास में सूर्य देव की विशेष पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह सूर्य की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। पौष पूर्णिमा के दिन तिल, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसी कारण इस दिन दान-पुण्य के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।

मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगा खरमास

जनवरी माह का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और एक माह से चल रहा खरमास समाप्त हो जाएगा। खरमास के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और सूर्य के उत्तरायण होने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

पौष पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में पौष मास की पूर्णिमा को स्नान-दान की पूर्णिमा कहा गया है। यह तिथि सूर्य और चंद्रमा के विशेष संयोग का प्रतीक मानी जाती है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस वर्ष पौष पूर्णिमा आर्द्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग जैसे शुभ संयोगों में मनाई जा रही है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के तन, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। सुबह से ही श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचकर स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

बसंत पंचमी पर विद्या की आराधना

23 जनवरी को माघ शुक्ल पंचमी के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। विद्यार्थी इस दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजा कर ज्ञान, बुद्धि और विवेक की कामना करते हैं। पीले वस्त्र धारण करना और पीले रंग के प्रसाद का भी इस दिन विशेष महत्व माना गया है।

2026 में ग्रहणों का संयोग

नववर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण शामिल हैं। इनमें से केवल एक चंद्रग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। धार्मिक दृष्टि से ग्रहण काल के दौरान जप, ध्यान और दान को विशेष महत्व दिया जाता है।

आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण

जनवरी 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यकारी और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पौष पूर्णिमा से लेकर बसंत पंचमी तक आने वाले ये पर्व न केवल आस्था और परंपरा को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सेवा, दान और आध्यात्मिक चेतना को भी बढ़ावा देते हैं। गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सनातन परंपराएं आज भी लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

मौनी अमावस्या का पुण्यकाल

18 जनवरी को माघ कृष्ण अमावस्या के दिन मौनी अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु मौन व्रत धारण कर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। इस अवसर पर तिल, अन्न, वस्त्र, कंबल और फल आदि का दान विशेष पुण्यकारी माना गया है।

गुप्त नवरात्र और साधना का समय

19 जनवरी से माघ शुक्ल प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। यह नवरात्र विशेष रूप से साधकों और उपासकों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान शक्ति उपासना और कठिन साधनाओं का विशेष महत्व रहता है। दस महाविद्याओं की आराधना कर साधक आध्यात्मिक सिद्धि की कामना करते हैं।

YashoRaj IT Solutions
Advertisement

Instagram

Facebook

yashoraj infosys, Best Web design company in patna 8

YashoRaj IT Solutions

Trending