हरियाणा
सरस्वती महोत्सव में सीएम सैनी ने रेखांकित किया सरस्वती नदी का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व, सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं की घोषणा
पिहोवा (हरियाणा):
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिहोवा में आयोजित भव्य सरस्वती महोत्सव के अवसर पर सरस्वती नदी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सरस्वती केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और चेतना की जीवनधारा रही है। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी भारतीय संस्कृति को एक “पवित्र सूत्र” में बांधने का कार्य करती है और यह हमारी प्राचीन विरासत की सबसे महत्वपूर्ण पहचान है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि हरियाणा सरकार सरस्वती नदी से जुड़े क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की आधारभूत संरचना और पर्यटन परियोजनाएं शुरू करने जा रही है। इन परियोजनाओं में नए जलाशयों का निर्माण, पुलों का विकास, घाटों का सौंदर्यीकरण और ऐतिहासिक धरोहर स्थलों का संरक्षण शामिल है।
सरस्वती: भारत की प्राचीन सभ्यता की आधारशिला
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक काल से लेकर महाभारत काल तक सरस्वती नदी का उल्लेख हमारे पवित्र ग्रंथों में मिलता है। यह नदी केवल जल का स्रोत नहीं थी, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, ज्ञान और तपस्या की प्रतीक रही है। ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही यह धरती आज भी भारतीय परंपरा की जीवंत मिसाल है।
उन्होंने कहा कि पिहोवा, कुरुक्षेत्र और आसपास का क्षेत्र सरस्वती सभ्यता का केंद्र रहा है और सरकार का दायित्व है कि इस ऐतिहासिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाए।
विकास और आस्था का संगम
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सरस्वती महोत्सव केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह विकास और आस्था के संगम का प्रतीक है। सरकार की योजना है कि सरस्वती नदी से जुड़े स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जाए।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजनाओं के तहत:
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सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह को पुनर्जीवित करने के प्रयास
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नए जलाशयों और जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण
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प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए आधुनिक पुल और सड़क नेटवर्क
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घाटों, मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों का सौंदर्यीकरण
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सांस्कृतिक केंद्र और संग्रहालयों की स्थापना
जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।
पर्यटन से रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड सेवा और स्थानीय व्यापार को इससे बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाए, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।
ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण
सीएम सैनी ने जोर देते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरस्वती नदी से जुड़े सभी ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की पहचान कर उन्हें संरक्षित किया जाए। इसके लिए विशेषज्ञों, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की सहायता ली जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सरस्वती सभ्यता से जुड़ी जानकारी को आम जनता, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाया जाएगा।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरस्वती नदी पूरे देश को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का कार्य करती है। यह नदी उत्तर भारत से लेकर पश्चिम भारत तक भारतीय सभ्यता की निरंतरता का प्रमाण है। सरस्वती महोत्सव जैसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हैं और हमारी जड़ों से जोड़ते हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें, उसे अपनाएं और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार सरस्वती नदी के संरक्षण और विकास को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ भी समन्वय किया जा रहा है ताकि इन परियोजनाओं को और व्यापक रूप दिया जा सके।
उन्होंने कहा,
“सरस्वती हमारी आस्था, हमारी पहचान और हमारी विरासत है। इसका संरक्षण करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब
सरस्वती महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा, सांस्कृतिक कलाकार और आम नागरिक शामिल हुए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक नृत्यों, भजनों और प्रदर्शनी ने महोत्सव को और भी भव्य बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सरस्वती नदी के संरक्षण और स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी करें।

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