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पंजाब

अकाली पहचान पर कायम रहे धामी, सीएम मान के आरोपों का दिया करारा जवाब

चंडीगढ़ | राजनीतिक डेस्क

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बयान पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि उन्हें सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिरोमणि अकाली दल का सिपाही होने पर गर्व है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अकाली दल और SGPC का रिश्ता ऐतिहासिक और वैचारिक रूप से जुड़ा हुआ है, जिसे अलग नहीं किया जा सकता।

धामी का यह बयान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने मजिठा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान SGPC प्रमुख पर सीधा हमला बोला था।


सीएम मान का तीखा हमला

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरजिंदर सिंह धामी पर निशाना साधते हुए कहा था,

“वह श्री गुरु गोबिंद सिंह के सिपाही बनने की बजाय सुखबीर बादल के सिपाही बन गए हैं।”

सीएम मान ने आरोप लगाया कि धामी, SGPC अध्यक्ष होने के नाते अपनी धार्मिक जिम्मेदारियों से अधिक अकाली दल के राजनीतिक हितों की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक धार्मिक संस्था के प्रमुख को राजनीतिक एजेंडे से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।


धामी का स्पष्ट और सशक्त जवाब

हरजिंदर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SGPC और अकाली दल का रिश्ता नया नहीं है, बल्कि यह सिख इतिहास और परंपरा से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा,

“पूर्व SGPC अध्यक्ष पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहरा और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा मिलकर फैसले लिए। जब पहले ऐसा होता रहा है, तो आज SGPC और अकाली दल को अलग कैसे किया जा सकता है?”

धामी ने आगे कहा कि वह एक अकाली होने पर गर्व महसूस करते हैं, लेकिन इसके साथ ही SGPC के मुख्य सेवादार के रूप में संस्था की मर्यादा, परंपराओं और अधिकारों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

“मैं अकाली होने पर गर्व करता हूं, और साथ ही SGPC की गरिमा से कभी समझौता नहीं करूंगा,” उन्होंने कहा।


SGPC प्रवक्ता ने भी सीएम मान की आलोचना की

SGPC की कार्यकारिणी समिति के सदस्य और प्रवक्ता गुरप्रीत सिंह झब्बर ने मुख्यमंत्री मान के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह बयान मुख्यमंत्री के हालिया व्यवहार के बिल्कुल विपरीत है।

झब्बर ने याद दिलाया कि 15 जनवरी को मुख्यमंत्री मान, अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज के समक्ष SGPC सचिवालय में विनम्रता से पेश हुए थे।

“उस समय मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया था कि उन्हें सिख रहत मर्यादा की सीमित जानकारी है और उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी न करने का आश्वासन दिया था। लेकिन यह समझदारी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी,” झब्बर ने कहा।


धामी की छवि पर हमला बताया

गुरप्रीत सिंह झब्बर ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान ने एक ऐसे व्यक्ति की छवि को धूमिल करने की कोशिश की है, जो पांच बार SGPC अध्यक्ष रह चुके हैं और जिन्होंने 80 के दशक के अशांत समय में निर्दोष सिख युवाओं के लिए बिना किसी फीस के कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

उन्होंने कहा,

“हरजिंदर सिंह धामी ने सिख समाज के लिए निस्वार्थ सेवा की है। उनकी निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल उठाना पूरे सिख समुदाय का अपमान है।”


धार्मिक और राजनीतिक टकराव फिर चर्चा में

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाब में धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के रिश्ते को लेकर बहस तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं को राजनीति से दूर रहना चाहिए, जबकि अकाली दल और SGPC इसे ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बताते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में पंजाब की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां धार्मिक भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं।


निष्कर्ष

सीएम भगवंत सिंह मान और SGPC नेतृत्व के बीच शुरू हुआ यह बयानबाज़ी का दौर अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर असर डाल रहा है। जहां मुख्यमंत्री मान धामी पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं, वहीं धामी अपने अकाली होने और SGPC की गरिमा की रक्षा करने पर अडिग हैं।

आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है, जिससे पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

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