पंजाब
तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब को ‘पवित्र नगर’ का दर्जा दिलाने की पहल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उठाई ऐतिहासिक मांग
चंडीगढ़/नांदेड़:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सिख समुदाय की आस्था और विरासत से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मान ने घोषणा की है कि पंजाब सरकार, महाराष्ट्र सरकार के समक्ष तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब, नांदेड़ को ‘पवित्र नगर (Holy City)’ का दर्जा दिए जाने की औपचारिक मांग रखेगी। यह स्थल सिख धर्म के पाँच पवित्र तख्तों में से एक है और विश्वभर के करोड़ों सिखों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिख इतिहास, परंपरा और गुरु परंपरा की जीवंत पहचान है। ऐसे में इसका संरक्षण, विकास और आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए इसे पवित्र नगर का विशेष दर्जा मिलना आवश्यक है।
सिख इतिहास में तख्त श्री हजूर साहिब का विशेष स्थान
तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब का सिख इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह वही पवित्र स्थल है जहाँ दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे और यहीं उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया था। यही कारण है कि यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अतुलनीय है।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से नांदेड़ पहुंचते हैं। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के अलावा कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से भी बड़ी संख्या में संगत यहां मत्था टेकने आती है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा,
“तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब सिख धर्म की आत्मा से जुड़ा स्थल है। गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाएं और बलिदान यहीं से संपूर्ण मानवता को दिशा देते हैं। ऐसे पवित्र स्थल को ‘पवित्र नगर’ का दर्जा मिलना समय की मांग है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार इस विषय पर महाराष्ट्र सरकार के साथ सकारात्मक संवाद करेगी और केंद्र सरकार से भी सहयोग मांगेगी, ताकि इस मांग को मूर्त रूप दिया जा सके।
पवित्र नगर का दर्जा मिलने से क्या होगा लाभ?
यदि तख्त श्री हजूर साहिब को पवित्र नगर का दर्जा मिलता है, तो इसके कई दूरगामी लाभ होंगे:
धार्मिक गरिमा की रक्षा – शराब, तंबाकू और मांसाहार जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध संभव
यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं – स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और यातायात व्यवस्था में सुधार
संरक्षण और विकास – ऐतिहासिक इमारतों और गुरुद्वारों का बेहतर संरक्षण
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिख तीर्थ पर्यटन को मजबूती
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल – रोजगार और व्यापार के नए अवसर
सिख संगठनों और श्रद्धालुओं में खुशी की लहर
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद सिख संगठनों, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों और श्रद्धालुओं में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया। कई धार्मिक संगठनों ने इसे “सिख भावना का सम्मान” बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान का आभार जताया।
सिख विद्वानों का मानना है कि यह मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन पहली बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री ने इसे इतनी मजबूती और गंभीरता से आगे बढ़ाया है।
पंजाब-महाराष्ट्र धार्मिक सहयोग की नई पहल
इस पहल को केवल धार्मिक मांग नहीं, बल्कि राज्यों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहयोग के रूप में भी देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री मान ने संकेत दिए कि पंजाब और महाराष्ट्र मिलकर सिख विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए संयुक्त प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी का संदेश सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण भारत और मानवता के लिए है।
राजनीति से ऊपर आस्था का विषय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी या सरकार से ऊपर उठकर सिख समाज की सामूहिक भावना से जुड़ा है। मुख्यमंत्री मान ने भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि श्रद्धा और ऐतिहासिक जिम्मेदारी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि सिखों की आस्था का सम्मान करना हर सरकार का नैतिक कर्तव्य है।
केंद्र सरकार से भी सहयोग की उम्मीद
पंजाब सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा रखती है, क्योंकि पवित्र नगर का दर्जा देने से जुड़े कई नियम और नीतियां केंद्र स्तर पर भी जुड़ी होती हैं। मुख्यमंत्री मान ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार सिख समुदाय की भावनाओं को समझेगी और सकारात्मक रुख अपनाएगी।
निष्कर्ष
तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब को पवित्र नगर का दर्जा दिलाने की मांग केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सिख इतिहास, संस्कृति और आस्था को सम्मान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की यह पहल आने वाले समय में सिख धर्मस्थलों के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
अब सभी की निगाहें महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो यह सिख समुदाय के लिए गर्व और सम्मान का विषय होगा।

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