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मध्य प्रदेश

देशी नस्ल के कुत्ते शामिल होंगे एंटी-पोचिंग स्क्वॉड में, सीएम का निर्देश

🐕 वन सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत

देशी नस्ल के कुत्ते शामिल होंगे एंटी-पोचिंग स्क्वॉड में, सीएम का निर्देश

भोपाल से वन संरक्षण से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि राज्य के एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) दस्ते में देशी नस्ल के कुत्तों को शामिल किया जाए। सरकार का मानना है कि इस कदम से वन्यजीव सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और दुर्गम इलाकों में शिकारियों का पता लगाना आसान होगा।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े वन क्षेत्रों में से एक है, जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।


🌳 क्यों जरूरी है यह कदम?

मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट” के नाम से भी जाना जाता है। यहां कई राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य स्थित हैं। लेकिन समय-समय पर अवैध शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के कारण शिकारियों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

सरकार का मानना है कि देशी नस्ल के कुत्ते स्थानीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल होते हैं। उनकी सूंघने की क्षमता और सहनशक्ति उन्हें जंगलों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी।


🐾 एंटी-पोचिंग स्क्वॉड कैसे करेगा काम?

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चयनित देशी नस्ल के कुत्तों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें शिकारियों के पदचिन्ह पहचानने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और जंगलों में लंबी दूरी तय करने के लिए तैयार किया जाएगा।

इन कुत्तों को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित हैंडलर्स के साथ तैनात किया जाएगा। इससे वन रक्षकों की टीम और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगी।


🏞️ वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से न केवल शिकार की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी नई दिशा मिलेगी। देशी नस्लों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय पशुपालकों को भी लाभ मिल सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि

“हमारे वन और वन्यजीव हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।”


📊 तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का संगम

सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक — जैसे ड्रोन निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग — के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों का भी उपयोग किया जाए। देशी कुत्तों की भागीदारी इसी सोच का हिस्सा है, जहां स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाएगा।


🗣️ विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

जहां इस कदम की सराहना की जा रही है, वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि उचित प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होगा। यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।


📌 निष्कर्ष

मध्य प्रदेश सरकार का एंटी-पोचिंग स्क्वॉड में देशी नस्ल के कुत्तों को शामिल करने का फैसला वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस योजना का क्रियान्वयन कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ होता है।

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